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328 पवित्र स्वरूप गुम मामला: पंथक संगठनों का उबाल, अकाल तख्त–SGPC पर दबाव बढ़ा
Video Desk Amar Ujala Dot Com Published by: चंद्रप्रकाश नीरज Updated Fri, 09 Jan 2026 04:52 PM IST
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र स्वरूपों के गुम होने के मामले ने एक बार फिर सिख सियासत और पंथक संस्थाओं में उबाल ला दिया है। विभिन्न पंथक संगठनों ने जत्थेदार अकाल तख्त साहिब से दो टूक अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में बादल ग्रुप और एसजीपीसी नेतृत्व के दबाव में आकर गुनहगारों की ढाल न बनें, बल्कि जांच को तार्किक अंजाम तक पहुंचाएं। भाई मोहकम सिंह, मनजीत सिंह भोमा, सतनाम सिंह मनावां, बाबा मेजर सिंह, पूर्व पंज प्यारे और अन्य नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 328 पवित्र स्वरूपों की जांच में जानबूझकर रुकावट डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि जत्थेदार अकाल तख्त साहिब की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे राजनीतिक दबावों से ऊपर उठकर सच्चाई पंथ के सामने रखें, चाहे गुनहगार कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अकाल तख्त साहिब का सचिवालय, अकाल तख्त का ही अभिन्न हिस्सा है और इसके अधिकारों पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंथक संगठनों ने साफ किया कि यदि न्याय नहीं मिला तो संगत और पंथ आगे की रणनीति स्वयं तय करेंगे। पंथक नेताओं ने आरोप लगाया कि अतीत में जत्थेदारों की नियुक्ति और हटाने के फैसले रातोंरात किए गए, जिससे पंथक मर्यादाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने आगाह किया कि यदि 328 स्वरूपों के मामले में भी ऐसा हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसी मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के महिला विंग ने तेजा सिंह समुंद्री हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। वर्किंग अध्यक्ष ईमान सिंह मान और महासचिव हरपाल सिंह बलेर की अगुआई में महिला विंग ने एसजीपीसी को ज्ञापन सौंपा और प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां देने की कोशिश की, हालांकि एसजीपीसी के अतिरिक्त सचिव विज्य सिंह ने चूड़ियां लेने से इन्कार कर दिया। ईमान सिंह मान ने कहा कि सिख परंपरा में चूड़ियां जिम्मेदारी का एहसास दिलाने का प्रतीक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 328 पवित्र स्वरूपों के मामले में न तो जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही पारदर्शी जांच सामने आई। उन्होंने दोहरे मापदंड अपनाने और संगत पर दर्ज मामलों को तुरंत रद्द करने की मांग की।
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