{"_id":"6a326bf7b102dbf5d70696e5","slug":"video-stray-dogs-terrorize-jagraon-residents-distressed-2026-06-17","type":"video","status":"publish","title_hn":"जगराओं में आवारा कुत्तों का आतंक, लोग परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जगराओं के पॉश इलाके मोती बाग में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि छोटे बच्चों का गली में खेलना लगभग बंद हो गया है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि आवारा कुत्तों ने कई लोगों को काटकर घायल कर दिया है, लेकिन नगर कौंसिल और प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे।
ताजा घटनाओं के बाद इलाके में भय का माहौल है। अभिभावकों ने अपने बच्चों के अकेले बाहर खेलने पर रोक लगा दी है। लोगों का कहना है कि गली से गुजरने वाले राहगीरों पर कुत्ते अचानक हमला कर देते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
स्थानीय निवासी प्रकाश कौर और परमजीत कौर ने बताया कि जब भी कोई व्यक्ति गली से गुजरता है तो कुत्ते उस पर झुंड बनाकर टूट पड़ते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कुत्ते उन्हें भी काट चुके हैं। जिन में महिंगा राम सुखविंदर सिंह के अलावा हाल ही में सात वर्षीय एक बच्ची काविया समेत कई लोग इन कुत्तों का शिकार बन चुके हैं। लोगों का कहना है कि आवारा कुत्तों के डर से बच्चे घरों में कैद होकर रह गए हैं और सुबह-शाम सैर करने वाले लोग भी सुरक्षा के लिए हाथ में डंडा लेकर निकलने को मजबूर हैं।
लाखों रुपये खर्च होने के दावों पर उठे सवाल
इलाके के लोगों ने नगर कौंसिल के उन दावों पर सवाल खड़े किए हैं जिनमें हर साल कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण पर लाखों रुपये खर्च करने की बात कही जाती है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में नसबंदी अभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है तो शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है।
निवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और नगर कौंसिल को लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
नगर कौंसिल के पास नहीं पर्याप्त इंतजाम
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ए-क्लास नगर कौंसिल जगराओं के पास न तो बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए कोई स्थायी कांजी हाउस (कैंटल) है और न ही आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि कम से कम कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अभियान को प्रभावी ढंग से चलाया जाना चाहिए, लेकिन अधिकारी इस दिशा में भी गंभीर नजर नहीं आते।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि शहरवासियों को राहत मिल सके और बच्चे फिर से सुरक्षित माहौल में खेल सकें। फिलहाल मोती बाग के निवासी दहशत के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
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