अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह से जुड़े खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने रविवार को प्रेस वार्ता में अंजुमन के ऐतिहासिक महत्व और उसके रिकॉर्ड रूम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अजमेर दरगाह से जुड़े खादिमों का इतिहास 800 वर्षों से भी अधिक पुराना है और ये खादिम पीढ़ी दर पीढ़ी दरगाह की परंपराओं और व्यवस्थाओं को निभा रहे हैं।
दस्तावेज सुरक्षित
सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि अंजुमन के रिकॉर्ड रूम में दरगाह से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। इनमें दरगाह बम ब्लास्ट केस, दरगाह दीवान मामला, दरगाह चढ़ावा प्रकरण सहित वे सभी मामले शामिल हैं, जो दरगाह की ओर से न्यायालय में दायर किए गए हैं या वर्तमान में विचाराधीन हैं।
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दस्तावेज कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण
उन्होंने स्पष्ट किया कि अंजुमन के पास मौजूद ये दस्तावेज न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि दरगाह के इतिहास, प्रशासन और परंपराओं का भी सशक्त प्रमाण हैं। अंजुमन का रिकॉर्ड रूम दरगाह से जुड़े मामलों में सत्य और तथ्यों को सामने लाने में अहम भूमिका निभाता रहा है।