लाखों लोगों की अनन्य श्रद्धा के केन्द्र बेणेश्वर धाम पर आदिवासियों का महाकुंभ बेणेश्वर मेले के तहत माघ पूर्णिमा पर आस्था ज्वार उमड़ पड़ा। माघ पूर्णिमा पर मुख्य मेले में राजस्थान, गुजरात, एमपी और महाराष्ट्र के लाखों लोगों ने मेले में सम्मिलित होते हुए सोम, माही और जाखम के त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। दिवंगत परिजनों की अस्थियों का विसर्जन कर देव दर्शन किए। महंत अच्युतानंद महाराज की पालकी यात्रा और राजसी स्नान आकर्षण का केंद्र रहा।
बेणेश्वर मेले के तहत माघ पूर्णिमा पर हजारों मेलार्थियों ने अपने दिवंगत परिजनों की मुक्ति की कामना से त्रिवेणी संगम तीर्थ में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ अस्थियों का विसर्जन किया। भोर से शुरू हुआ अस्थि विसर्जन का क्रम दोपहर बाद तक बना रहा । अस्थि विसर्जन के उपरांत मेलार्थियों ने शुद्ध वस्त्र धारण कर अपने पितरों आदि के नाम जलांजलि से तर्पण कर पूजन किया और भगवान भास्कर को अर्घ्य चढ़ाया। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने माघ पूर्णिमा पर पवित्र जल में आस्था की डूबकी लगाई। इसके बाद बेणेश्वर शिवालय, राधा कृष्ण मंदिर, ब्राहृा मंदिर व अन्य देवालयों में जाकर देव दर्शानादि करने के बाद मेला बाजारों से खरीददारी करते हुए मेले का लुत्फ उठाया।
पढे़ं: मिस एंड मिसेज राजस्थान ग्लैम 2026: फैशन से आत्मविश्वास तक, महिलाओं के सशक्तिकरण की नई पहल
महंत की पालकी यात्रा और राजसी स्नान आकर्षण का केंद्र
मेले का मुख्य आकर्षण निष्कलंक महाराज भगवान एवं महंत की पालकी यात्रा एवं संगम पर महंत अच्युतानंद महाराज का राजसी स्नान रहा। मावजी महाराज की जन्मस्थली साबला के हरिमंदिर से गाजेबाजे के साथ निष्कलंक भगवान एवं महंत की पालकी यात्राएं निकली। महंत ने जल तीर्थों का आह्वान किया और मावजी महाराज सहित बेणेश्वर के आद्य महंतों का स्मरण करते हुए पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ राजसी स्नान किया और भक्तों को आशीर्वाद दिया।
सतर्क रहा प्रशासन
जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई है। सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन की ओर से जहां 800 से अधिक पुलिस के जवान तैनात किए गए। वहीं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी पुलिस प्रशासन मेले की गतिविधियों पर पूरी नजर बनाए रखे।