जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य की डबल इंजन सरकार सभी वर्गों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और माटी कला से जुड़े शिल्पकारों के उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि माटी कला केवल परंपरा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और आजीविका का सशक्त माध्यम है।
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम में कुम्हार, कुमावत और प्रजापत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने बजट घोषणाओं और समाज हित में किए गए प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप माटी कला से जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि शिल्पकारों और कामगारों की सामाजिक सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े दस्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से वर्ष 2025 तक लाखों लोगों को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी गई है। साथ ही, श्रमिकों, स्ट्रीट वेंडर्स और लोक कलाकारों के लिए मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया है।
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उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल करते हुए छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को दी जाने वाली मासिक सहायता राशि बढ़ाकर 3,250 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को कक्षा 8 के बाद प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि माटी कला के विकास के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। माटी कला बोर्ड के माध्यम से हजारों कामगारों को इलेक्ट्रिक चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। डूंगरपुर में शिल्पग्राम के निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
कार्यक्रम में माटी कला से जुड़ी पुस्तक ‘माटी राजस्थान री’ का विमोचन किया गया और समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को ‘माटी के लाल’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिल्पकार और समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।