मंगलवार सुबह बालोतरा जिले के चौथी फाटक के पास एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब बजरी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली लूणी नदी की रपट पार करते समय तेज बहाव में बह गई। हादसे के वक्त चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए ट्रैक्टर से कूदकर अपनी जान बचा ली, जिससे एक बड़ी त्रासदी टल गई। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। स्थानीय लोगों की मदद से कई घंटों की मशक्कत के बाद क्रेन की सहायता से ट्रैक्टर-ट्रॉली को नदी से बाहर निकाला गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट की देरी हो जाती, तो हादसा गंभीर रूप ले सकता था।
प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में प्रशासन के प्रति नाराज़गी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि लगातार बारिश और नदी में बढ़ते जलस्तर के बावजूद रपट को आम आवाजाही के लिए बंद नहीं किया गया। लूणी नदी के इस हिस्से में अक्सर जलभराव की स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन द्वारा न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही कोई बैरिकेडिंग की गई थी। स्थानीय निवासी योगेश सोनी ने बताया, “हर साल बारिश में यही हाल होता है, लेकिन प्रशासन कोई सबक नहीं लेता। खतरे के बावजूद रपट को खुला रखा जाता है।”
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ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग
हादसे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलप्लावित क्षेत्रों, विशेषकर रपटों पर समय रहते चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग लगाई जाए। साथ ही, यदि जरूरत हो तो वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों की जान जोखिम में न पड़े। इस घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान बालोतरा और आसपास के क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते पुख्ता सुरक्षा उपाय करने चाहिए ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।