राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को जालौर पहुंचे, जहां उन्होंने पूर्व मंत्री पुखराज पाराशर के निवास पर पहुंचकर उनके पिता के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार, पंचायत चुनाव, कानून व्यवस्था, लोकतंत्र और कई जनहित मुद्दों पर सरकार को घेरा।
शोक संवेदना के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मुलाकात
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को जालौर दौरे पर पहुंचे। यहां उन्होंने राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री एवं निराकरण समिति के अध्यक्ष पुखराज पाराशर के निवास पर पहुंचकर उनके पिता के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे और पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन पर जोरदार स्वागत किया गया। बाद में वे कांग्रेस कार्यालय राजीव गांधी भवन पहुंचे, जहां पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री की चौपाल पर उठाए सवाल
इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अशोक गहलोत ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री की चौपाल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली चौपाल का मतलब गांव के आम लोगों की समस्याएं सुनना और मौके पर समाधान करना होता है, लेकिन वर्तमान में केवल चुनिंदा लोगों को बुलाकर औपचारिक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में गांवों की समस्याएं सुनें तो प्रदेश का भला हो सकता है।
'भाजपा को हार का डर, इसलिए टाले जा रहे चुनाव'
निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर गहलोत ने कहा कि संविधान के तहत समय पर चुनाव करवाना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को पंचायत और निकाय चुनावों में हार का डर सता रहा है, इसलिए अदालतों के निर्देशों के बावजूद चुनाव नहीं कराए जा रहे। उन्होंने कहा कि संविधान की अवहेलना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला
प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राजस्थान में हत्या, बलात्कार और अन्य गंभीर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे लोग लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन करने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील
अशोक गहलोत ने युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि देश के सामने गंभीर चुनौतियां हैं और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए युवाओं को राजनीतिक विचारधारा समझकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र कमजोर हुआ तो आने वाली पीढ़ियां इसका खामियाजा भुगतेंगी।
प्रसूता मौतों पर जवाबदेही तय करने की मांग
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने सरकारी अस्पतालों में हाल ही में हुई घटनाओं और प्रसूताओं की मौतों को बेहद गंभीर बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते गंभीरता से काम नहीं करेगी तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा। अंत में गहलोत ने कहा कि वह जहां भी रहेंगे, राजस्थान की जनता की सेवा करना उनका कर्तव्य और धर्म है।
विधान परिषद गठन का मुद्दा फिर उठाया
मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने राजस्थान में विधान परिषद बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में राजस्थान में विधान परिषद गठन का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया दिल्ली स्तर पर अटक गई। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को दोबारा आगे बढ़ाने का आग्रह किया है।
गहलोत ने कहा कि यदि राजस्थान में विधान परिषद बनती है तो इसमें प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर, साहित्यकार, पत्रकार, बुद्धिजीवी और समाज के विभिन्न अनुभवी वर्गों को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। कई बार सरकारों के सामने ऐसी स्थिति आती है जब सभी विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल करना संभव नहीं होता, ऐसे में विधान परिषद के माध्यम से योग्य और अनुभवी लोगों को प्रशासन में शामिल कर बेहतर शासन व्यवस्था बनाई जा सकती है।
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'पद नहीं, जनता की सेवा ही लक्ष्य'
उन्होंने कहा कि कई बार फैसले लेने में गलतियां हो जाती हैं, लेकिन सरकार की नीयत पारदर्शी होनी चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि वह जहां भी रहेंगे, चाहे दिल्ली, जयपुर, जोधपुर या जालौर, राजस्थान की जनता की सेवा करना उनका कर्तव्य रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जीवन में सब कुछ दिया है और अब वे बिना किसी पद की इच्छा के केवल जनता और संगठन के हित में काम करते रहेंगे।