राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत एएनटीएफ (Anti Narcotics Task Force) को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन तंत्रीपाल के अंतर्गत लंबे समय से फरार चल रहे शातिर ड्रग तस्कर सहदेव को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी फरारी के दौरान बार-बार नाम और पहचान बदलकर अज्ञातवास में रह रहा था। इसी रणनीति के चलते इस कार्रवाई को महाभारत के पात्र सहदेव के गुप्त नाम तंत्रीपाल पर आधारित कूट नाम दिया गया।
एटीएस व एएनटीएफ के महानिरीक्षक पुलिस श्री विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री एम.एन. दिनेश के निर्देशन में नशे के बड़े तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। आरोपी सहदेव राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में ठिकाने बदल-बदलकर अपने नेटवर्क के माध्यम से तस्करी का संचालन करता रहा।
ऐसे पहुंची टीम आरोपी तक
फरारी के दौरान सहदेव कभी एक स्थान पर नहीं ठहरता था। जांच में सामने आया कि करीब दो माह पहले उसका बाइक एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उसके पैरों में गंभीर चोट आई। इलाज के लिए वह जोधपुर आया, लेकिन फर्जी पहचान के कारण अस्पताल के रिकॉर्ड में उसका असली नाम दर्ज नहीं हो सका। कड़ी पूछताछ के दौरान एक सहयोगी से जानकारी मिली कि सहदेव जनवरी के अंतिम सप्ताह में जोधपुर आने वाला है। इसके बाद टीम ने उसके संपर्कों पर निगरानी शुरू की। आखिरकार आरोपी एक रिश्तेदार के घर लंगड़ाते हुए पहुंचा और वहां से मोटरसाइकिल पर निकला। सीसीटीवी फुटेज और नंबर प्लेट के आधार पर पीछा कर पाली की ओर जाते समय मोगड़ा गांव के पास उसे धर दबोचा गया।
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पहचान छुपाने में था माहिर
गिरफ्तारी के बाद भी सहदेव खुद को अपने भाई के रूप में पेश करता रहा और फर्जी दस्तावेज दिखाए। हालांकि पैरों की चोट ने पुलिस के शक को और गहरा कर दिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि पावटा स्थित सोनी मेडिहब अस्पताल में उसने अपने भाई की पहचान से इलाज कराया था। इसी वजह से पुलिस उसे लंबे समय तक ट्रेस नहीं कर पाई। वह तस्करी की कई बड़ी खेपों में शामिल रहा, लेकिन हर बार फर्जी नामों के कारण बच निकलता था। भीलवाड़ा पुलिस द्वारा उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
अपराध की राह पर कैसे बढ़ा
सहदेव ने बारहवीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। हेंडीक्राफ्ट, फाइनेंस, मजदूरी और ड्राइविंग जैसे काम किए, लेकिन आर्थिक असफलता के चलते वह अपने दो मौसेरे भाइयों के संपर्क में आया, जो पहले से मादक पदार्थ तस्करी में लिप्त थे। इसके बाद वह स्कॉर्पियो वाहन से मध्यप्रदेश से मादक पदार्थ लाकर राजस्थान में सप्लाई करने लगा। अवैध कमाई से उसकी आर्थिक स्थिति तो सुधरी, लेकिन समाज में नशे का जहर फैलता गया।
टीम को मिलेगा सम्मान
इस सफल कार्रवाई में एएनटीएफ जयपुर मुख्यालय और जोधपुर आयुक्तालय की टीम की विशेष भूमिका रही। पुलिस मुख्यालय स्तर पर टीम को सम्मानित किए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।