ऑल इंडिया एंटी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह (एम.एस.) बिट्टा जोधपुर प्रवास पर हैं। उन्होंने एयर मार्शल के हालिया बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के निचोड़ से स्पष्ट होता है कि भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान में उन्हीं डिफेंस और ट्रेनिंग ठिकानों को निशाना बनाया जो आतंकवाद की फैक्टरी के रूप में काम करते थे।
बिट्टा ने कहा कि वे स्थान गोला-बारूद तैयार करने, आतंकियों को प्रशिक्षण देने और सीमापार से भारत में घुसपैठ कर हमले की तैयारी करने के केंद्र थे, जिन्हें प्रभावी तरीके से नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि एयर मार्शल ने पूरे हिंदुस्तान के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि उन हरकतों का भारतीय पक्ष ने किस तरह जवाब दिया।
राजनीतिक एकजुटता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर सवाल
बिट्टा ने यह भी सवाल उठाए कि क्या भारत की राजनीतिक पार्टियां ऐसे राष्ट्रीय सुरक्षा मूलभूत मुद्दों पर एक हो पाएंगी और उन्होंने अमेरिका की भूमिका पर तीखा सवाल दागा। उनके तर्क के अनुसार कुछ अन्तरराष्ट्रीय गतिविधियां और समर्थन पाकिस्तान एवं उसकी आतंकवादी संरचनाओं को मजबूती देते दिखते हैं, और इसलिए सरकारों को सतर्क रहना चाहिए। बिट्टा ने इतिहास के कुछ घटनात्मक संदर्भों का उल्लेख करते हुए वैश्विक भूमिका और हितों पर कटु टिप्पणी की।
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तुर्की को लेकर टिप्पणी और मानवीयता का जिक्र
तुर्की-संबंधी विवाद पर बोलते हुए बिट्टा ने कहा कि भारत ने तुर्की को मानवीय आधार पर मदद पहुंचाई थी और यदि तुर्की आगे बढ़ना चाहता है तो उसे आतंकवादी नेटवर्क से दूरी बनानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने समय-समय पर संभावित खतरों का सामना करते हुए अपने सुरक्षा हितों की रक्षा की है और किसी भी प्रकार के आतंकवादी सहायता के खिलाफ सख्त रुख बनाए रखना चाहिए।
सैन्य उपलब्धियों और आलोचनाओं का संतुलन
बिट्टा के बयानों में सैन्य अभियानों की उपलब्धियों का जिक्र और विदेशी समर्थन-निगाह के प्रति कटाक्ष दोनों शामिल रहे। उन्होंने एयर मार्शल के बयान को देशवासियों के सामने एक स्पष्ट प्रस्तुति बताया, वहीं विदेशी नीतियों और उनके संभावित प्रभावों पर राजनीतिक नेतृत्व से जागरूकता और कड़ा रुख अपनाने की अपील की। बिट्टा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर राजनीतिक विमर्श में जनहित और सत्तारूढ़ता से ऊपर उभरकर निर्णय लेने होंगे।
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