प्रदेश के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व में स्थित त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर लगातार बढ़ती बाघों की चहलकदमी वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इस मार्ग से होकर रणथंभौर स्थित प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते-जाते हैं। ऐसे में बाघ, बाघिन और शावकों की लगातार मौजूदगी के कारण श्रद्धालुओं की जान पर खतरा बना हुआ है।
रणथंभौर के कोर एरिया से होकर गुजरता है त्रिनेत्र गणेश मार्ग
त्रिनेत्र गणेश मार्ग रणथंभौर टाइगर रिजर्व के बीचों-बीच स्थित है। रणथंभौर की हृदयस्थली माने जाने वाले जोन नंबर एक से पांच भी इसी मार्ग पर पड़ते हैं। यही कारण है कि यह इलाका बाघों की सघन आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। वन अधिकारियों के अनुसार, यह मार्ग बाघों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र में आता है, जहां उनका मूवमेंट स्वाभाविक रूप से अधिक रहता है।
आधे से ज्यादा बाघ इसी क्षेत्र में सक्रिय
वन विभाग के मुताबिक, रणथंभौर के कुल बाघों की आधी से भी अधिक आबादी इसी क्षेत्र में विचरण करती है। वर्तमान में त्रिनेत्र गणेश मार्ग और उसके आसपास करीब आधा दर्जन से अधिक बाघ, बाघिन और शावकों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। विशेष रूप से बाघिन सुल्ताना और बाघिन रिद्धि का मूवमेंट अक्सर इसी मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा है।
बाघिन सुल्ताना और रिद्धि का लगातार मूवमेंट
बाघिन सुल्ताना टी-107 ने हाल ही में त्रिनेत्र गणेश मार्ग स्थित मिश्रदर्रा गौमुखी क्षेत्र के पास शावकों को जन्म दिया है। इसी कारण उसका मूवमेंट इन दिनों त्रिनेत्र गणेश मार्ग और आसपास के इलाके तक सीमित है। वहीं उसका एक सब-एडल्ट शावक टी-25011 नई टेरिटरी की तलाश में इसी क्षेत्र में घूमता रहता है। दूसरी ओर, जोन नंबर तीन में विचरण करने वाली बाघिन रिद्धि टी-124 और उसके शावक टी-2504, टी-2505 और टी-2506 भी इन दिनों जोगी महल और रणथंभौर दुर्ग के आसपास देखे जा रहे हैं। इसके अलावा टाइगर गणेश टी-120 भी कई बार त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर नजर आ चुका है। कुछ अन्य बाघ-बाघिन भी कभी-कभार इस इलाके में पहुंच जाते हैं।
वन विभाग के लिए दोहरी चुनौती
त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर बाघों के मूवमेंट से सबसे बड़ा खतरा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर है। इस मार्ग पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। हालांकि, वन विभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर पैदल और दुपहिया वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। श्रद्धालुओं को केवल निर्धारित टैक्सी और आरजे-25 नंबर के चौपहिया वाहनों के जरिए ही त्रिनेत्र गणेश मंदिर तक जाने की अनुमति दी गई है।
कई बार बंद करना पड़ता है प्रवेश द्वार
इसके बावजूद कई बार बाघिन रिद्धि और उसके शावक रणथंभौर दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग क्षेत्र तक पहुंच जाते हैं। वहीं बाघिन सुल्ताना के सड़क पर आ जाने से वन विभाग को मजबूरन रणथंभौर का मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर श्रद्धालुओं की आवाजाही रोकनी पड़ती है। ऐसे हालात में गश्ती वाहनों को दौड़ाकर रास्ते और दुर्ग में फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ता है। इस दौरान वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो जाती है—एक ओर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और दूसरी ओर बाघों की निगरानी।
हर समय तैनात रहते हैं गश्ती वाहन
लगातार बढ़ते टाइगर मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह अलर्ट है। त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर गश्ती दल के दो वाहन हर समय तैनात रहते हैं, ताकि जैसे ही किसी बाघ या बाघिन की मौजूदगी सामने आए, तुरंत श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
श्रद्धालुओं और गाइडों में डर का माहौल
त्रिनेत्र गणेश के श्रद्धालुओं, रणथंभौर दुर्ग में पालकी चलाने वालों और गाइडों का कहना है कि वे वर्षों से बाघों को देखते आ रहे हैं, लेकिन जान का खतरा हमेशा बना रहता है। पिछले साल त्रिनेत्र गणेश मार्ग और रणथंभौर दुर्ग क्षेत्र में बाघ के हमले में तीन लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद वन विभाग ने पैदल आवाजाही पर रोक लगाई और गश्ती दल की तैनाती बढ़ाई थी। हमलावर बाघ-बाघिन को अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्ट भी किया गया था।
समाधान की कमी, एनटीसीए गाइडलाइन बनी बाधा
इसके बावजूद एक बार फिर त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर बाघों का मूवमेंट बढ़ गया है, जो न केवल वन विभाग बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी इस स्थिति से परेशान हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा।
त्रिनेत्र गणेश मार्ग रणथंभौर के कोर एरिया में स्थित है। ऐसे में एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) की गाइडलाइन के तहत न तो यहां तारबंदी की जा सकती है और न ही सुरक्षा दीवार बनाई जा सकती है।
भगवान भरोसे श्रद्धालुओं की सुरक्षा
ऐसे हालात में श्रद्धालुओं की सुरक्षा काफी हद तक भगवान त्रिनेत्र गणेश के भरोसे ही है। वन अधिकारी केवल सतर्कता बरतने की अपील कर सकते हैं और अपनी ओर से अधिकतम सुरक्षा देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन त्रिनेत्र गणेश मार्ग पर बढ़ता टाइगर मूवमेंट आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।