प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान में गरीब और घुमंतू परिवारों के सपनों का आशियाना बनाने के लिए योजनाओं को धरातल पर उतारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन टोंक जिले में अधिकारी और ग्राम पंचायतों के प्रशासक इस पूरी योजना पर पानी फेरने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
दरअसल, पूरा मामला टोंक जिले की दाखिया ग्राम पंचायत का है, जहां घुमंतू जाति के 100 से अधिक परिवार ग्राम विकास अधिकारी और प्रशासक बने सरपंच की मनमानी से परेशान हैं। दाखिया निवासी धारा सिंह कंजर ने बताया कि वे पिछले तीन महीनों से ग्राम पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सरपंच उन्हें आवास के लिए जमीन का पट्टा नहीं बना रहा है। अगर, उन्हें पट्टा मिल जाए तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनका सपनों का घर बन सकता है। अन्य परिवार भी बैंक से लोन लेकर अपना घर बना सकते हैं, लेकिन ग्राम पंचायत के प्रशासक और विकास अधिकारी उन्हें बार-बार भगा देते हैं। प्रशासक का कहना है कि जब जमीन स्वीकृत हो गई, तो पट्टे की क्या जरूरत है?
ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत
इस पूरे मामले को लेकर गांव के श्योजी, मुकेश और महिला बनसौर सहित कई ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा को शिकायत देकर जमीन का पट्टा जारी करने की मांग की। इस पर कलेक्टर ने तुरंत मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) परशुराम धानका और पंचायत समिति टोंक की विकास अधिकारी सविता राठौड़ को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। पीड़ितों की समस्या सुनने के बाद सीईओ परशुराम धानका ने ग्राम विकास अधिकारी को फोन कर पट्टे जारी करने के निर्देश दिए।