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Video: फीस वृद्धि के खिलाफ एसएफआई ने खोला मोर्चा, फैसला वापस लेने की उठाई मांग
शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Apr 2026 02:19 PM IST
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एसएफआई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने इसे छात्र विरोधी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। एसएफआई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी सचिव सन्नी सेक्टा ने कहा कि 28 मार्च को विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की ओर से लिए गए फैसले के तहत विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में करीब 25 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। साथ ही परीक्षा शुल्क में 50 प्रतिशत और छात्रावास शुल्क में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। बढ़ोतरी का असर कला स्नातकोत्तर, विधि स्नातक, विधि स्नातकोत्तर, पर्यटन प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, विज्ञान स्नातकोत्तर, प्रौद्योगिकी स्नातकोत्तर, पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन और होटल प्रबंधन जैसे पाठ्यक्रमों पर पड़ेगा। संगठन ने बताया कि शोध कार्यक्रम (पीएचडी) में शोध प्रबंध जमा करने और मूल्यांकन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा समय सीमा बढ़ाने के शुल्क में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं प्रबंधन, कंप्यूटर अनुप्रयोग, प्रौद्योगिकी, पर्यटन एवं विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रमों में परियोजना रिपोर्ट शुल्क में 200 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है। एसएफआई नेताओ ने कहा कि यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब छात्र और उनके परिवार आर्थिक दबाव में हैं। संगठन के अनुसार, सरकार विश्वविद्यालय को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं दे रही है, जिसके चलते विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। बजट में भी विश्वविद्यालय के लिए आवंटन में कमी की बात कही गई है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी शिक्षण संस्थानों को लगातार बंद या मर्ज किया जा रहा है, जबकि निजी संस्थानों का विस्तार हो रहा है। इससे सार्वजनिक शिक्षा कमजोर हो रही है और विद्यार्थियों को निजी संस्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। एसएफआई ने चेतावनी दी है कि यदि फीस बढ़ोतरी का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की है।
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