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अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी बोले- स्वार्थी का प्रेम स्वार्थ तक ही सीमित रहता है
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अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी बोले- स्वार्थी का प्रेम स्वार्थ तक ही सीमित रहता है
अयोध्या के पूराबाजार क्षेत्र के ऐमीआलापुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य ज्ञानचंद्र द्विवेदी ने कहा कि स्वार्थी मनुष्य का प्रेम तभी तक रहता है, जब तक उसके स्वार्थ में कोई बाधा नहीं आती। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग के माध्यम से धैर्य, विश्वास और त्याग का अद्भुत संदेश मिलता है। आचार्य द्विवेदी ने बताया कि विवाह के बाद जब देवकी अपने पति वासुदेव के साथ रथ पर विदा हो रही थीं, तब उनके भाई कंस स्वयं रथ की बागडोर संभाले हुए थे और भाई-बहन के प्रेम का भाव दिखाई दे रहा था। तभी आकाशवाणी हुई कि कंस की मृत्यु देवकी के आठवें पुत्र के हाथों होगी। यह सुनते ही कंस का प्रेम क्रोध में बदल गया और उसने देवकी को रथ से नीचे खींचकर मारने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कठिन परिस्थिति में भी माता देवकी शांत और मौन रहीं। न उन्होंने कंस से जीवनदान की याचना की और न ही वासुदेव से बचाने की गुहार लगाई। यही धैर्य, क्षमा और समता उन्हें भगवान की माता बनने के योग्य बनाती है।
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