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VIDEO: अयोध्या की स्मृतियों को कैनवास पर सहेज रहे देशभर के कलाकार, आस्था और विरासत को मिल रहे रंग
नई अयोध्या को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन पुरानी अयोध्या को चित्रों के माध्यम से सदियों तक सहेजा जा सकता है। यह बात महाराष्ट्र के कलाकार डगलस जॉन ने मंगलवार को कलर्स ऑफ अयोध्या अखिल भारतीय कला शिविर के पहले दिन कही। बताया कि वह अपनी पेंटिंग में अयोध्या और मुंबई के बाणगंगा की स्थापत्य परंपराओं को जोड़ रहे हैं। चित्र पूरा होने पर उसमें 24 कैरेट सोने का प्रयोग किया जाएगा।
कला दीर्घा, अंतरराष्ट्रीय दृश्यकला पत्रिका और जेबीएनएस सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय शिविर में नौ राज्यों के 10 कलाकार अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर, लोकजीवन और आध्यात्मिक परंपराओं को कैनवास पर उकेर रहे हैं। शिविर में तैयार कृतियों की प्रदर्शनी 19 जून को आयोजित की जाएगी।
पश्चिम बंगाल के सूर्यकांत दास भगवान राम के हृदय में विराजमान हनुमान का चित्र बनाकर भक्त और भगवान के संबंध को दर्शा रहे हैं। शिविर के क्यूरेटर डॉ. अवधेश मिश्र ने बिजूका को अपनी कला का विषय बनाया है। कहा कि खेतों की रखवाली करने वाले इस पात्र की तरह समाज में कई ऐसे लोग हैं, जिनका योगदान महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें सम्मान नहीं मिलता। कहा कि समाज के उन उपेक्षित पात्रों को सामने लाने का प्रयास है, जिनकी भूमिका महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें पहचान नहीं मिलती।
महाराष्ट्र के रामचंद्र खरटमल अपनी कृतियों में भगवान राम, बुद्ध और पार्श्वनाथ के माध्यम से अयोध्या की सांस्कृतिक समरसता को दर्शा रहे हैं। कलाकृति में शतरंज के चिह्नों को उकेर रहे हैं, जो अयोध्या के राजनीति के उतार-चढ़ाव का प्रतीक हैं। साथ ही राजकुमारी सूरी रत्ना और दक्षिण कोरिया के राजा किम सुरो के संबंध को चित्रित कर रामनगरी के वैश्विक जुड़ाव को भी उकेर रहे हैं।
तेलंगाना से पहली बार अयोध्या पहुंची अर्पिता रेड्डी भगवान नारायण और उनके अवतार श्रीराम को केंद्र में रखकर चित्र बना रही हैं। शिविर में बिहार से पद्मश्री श्याम शर्मा, हरियाणा से डॉ. राम विरंजन, गुजरात से कनु पटेल, मध्य प्रदेश से तृप्ति जोशी, ओडिशा से मानस रंजन जेना मौजूद रहे।
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