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US invited India to join Pax Silica: After the India-US trade deal, the US sent this special invitation to Ind
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US Invited India to Join Pax Silica: इंडिया-अमेरिका ट्रेड डील के बाद US ने भारत को भेजा ये खास न्योता
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sun, 08 Feb 2026 09:01 PM IST
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भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी पहल सामने आई है। अमेरिका ने भारत को अपनी महत्वाकांक्षी ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण दिया है। अमेरिकी पक्ष ने साफ किया है कि जल्द ही भारत सरकार के साथ इस पहल से जुड़े औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसे भारत–अमेरिका रिश्तों में रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने इस निमंत्रण की पुष्टि करते हुए कहा कि पैक्स सिलिका पहल का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाना और प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करना है। उनके मुताबिक, भारत को इस पहल में शामिल करने से दोनों देशों के संबंधों में “बहुत सकारात्मक गति” देखने को मिल रही है।
क्या है पैक्स सिलिका पहल?
पैक्स सिलिका पहल की शुरुआत अमेरिका ने दिसंबर 2025 में की थी। इसका मुख्य मकसद सिलिकॉन और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जो आधुनिक तकनीक और उद्योगों की रीढ़ माने जाते हैं। इसके साथ ही यह पहल उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।
इस पहल के जरिए अमेरिका और उसके साझेदार देश चीन पर निर्भर आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकल्प खड़े करना चाहते हैं। मौजूदा समय में सेमीकंडक्टर, AI और हाई-टेक इंडस्ट्री में कच्चे माल और तकनीक की आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा तेज है, ऐसे में पैक्स सिलिका को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
किन देशों के साथ है यह गठजोड़?
फिलहाल पैक्स सिलिका पहल में ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जापान, इस्राइल, सिंगापुर, कतर, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ग्रीस शामिल हैं। अब भारत को इस समूह में शामिल किया जाना अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।
भारत के शामिल होने से यह पहल न सिर्फ भौगोलिक रूप से मजबूत होगी, बल्कि मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और बाजार के लिहाज से भी इसका दायरा बढ़ेगा।
जैकब हेलबर्ग के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच इस पहल को लेकर जनवरी में ही सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी खनन और प्रसंस्करण परियोजनाएं मौजूद हैं, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अहम भूमिका निभा सकती हैं। खास तौर पर सिलिकॉन और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की क्षमता अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
हेलबर्ग ने यह भी कहा कि भारत, चीन के मुकाबले ऐसा एकमात्र देश है जहां युवा, तकनीकी रूप से प्रशिक्षित और बड़े पैमाने पर उपलब्ध कार्यबल मौजूद है। यही वजह है कि अमेरिका भारत को भविष्य का भरोसेमंद साझेदार मान रहा है।
पैक्स सिलिका पहल का निमंत्रण ऐसे समय पर आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच एक अहम व्यापार समझौते पर भी सहमति बनी है। इस समझौते के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम या समाप्त करेगा। वहीं अमेरिका, भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत तक लाने पर सहमत हुआ है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह व्यापार समझौता और पैक्स सिलिका पहल एक-दूसरे के पूरक हैं। इससे दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक हस्तांतरण और मैन्युफैक्चरिंग सहयोग को नई गति मिलेगी।
हेलबर्ग ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही बहुत बड़े देश हैं अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि भारत जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता देश है। ऐसे में सहयोग करना जटिल जरूर है, लेकिन संभावनाएं भी उतनी ही बड़ी हैं।
पैक्स सिलिका पहल में भारत की एंट्री को केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि चीन-केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला से हटकर वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिलेगा और अमेरिका को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत–अमेरिका संबंधों को व्यापार से आगे बढ़ाकर तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक रणनीति के स्तर पर नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है।
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