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India-Malaysia Ties: What agreements have been signed between India and Malaysia?
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India-Malaysia Ties: भारत-मलयेशिया के बीच हुए कौन-कौन से समझौते?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sun, 08 Feb 2026 08:55 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मलयेशिया दौरा भारत–मलयेशिया संबंधों में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। करीब एक दशक बाद हुई इस उच्चस्तरीय यात्रा ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊर्जा दी है। कुआलालंपुर से विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता में सचिव (ईस्ट) पी. कुमारन ने साफ कहा कि यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला है।
पी. कुमारन के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और मलयेशिया के प्रधानमंत्री के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की गई। व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, डिजिटल टेक्नोलॉजी, फिनटेक, संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। यही वजह है कि इस यात्रा के दौरान समझौतों और घोषणाओं की लंबी सूची सामने आई।
भारत और मलयेशिया के बीच ऑडियो-विजुअल सह-निर्माण समझौते से लेकर आपदा प्रबंधन, भ्रष्टाचार निरोध, स्वास्थ्य, सुरक्षा और तकनीकी शिक्षा तक कई अहम समझौते हुए। खास तौर पर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग पर नोट का आदान-प्रदान भविष्य की तकनीकी साझेदारी की नींव माना जा रहा है।
भ्रष्टाचार से निपटने के लिए मलयेशिया की एंटी-करप्शन एजेंसी और भारत की सीबीआई के बीच एमओयू भी इस दौरे की बड़ी उपलब्धि रही। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा सहयोग, बिग कैट्स एलायंस, सामाजिक सुरक्षा, व्यावसायिक शिक्षा (TVET) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषदों के बीच सहयोग पर भी सहमति बनी।
10वें मलेशिया–भारत सीईओ फोरम की रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण इस बात का संकेत है कि दोनों देश सिर्फ सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र और उद्योगों के जरिए भी रिश्तों को मजबूत करना चाहते हैं।
दौरे के दौरान कई अहम घोषणाएं भी की गईं। मलयेशिया में भारतीय वाणिज्य दूतावास खोलने का फैसला प्रवासी भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यूनिवर्सिटी मलाया में समर्पित तिरुवल्लुवर सेंटर और मलयेशियाई नागरिकों के लिए तिरुवल्लुवर स्कॉलरशिप की घोषणा ने शिक्षा और संस्कृति के रिश्तों को नई ऊंचाई दी।
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एनआईपीएल और पेनेट एसडीएन बीएचडी के बीच सीमा पार भुगतान समझौता भी खास है। इससे क्यूआर आधारित भुगतान और यूपीआई लिंक के जरिए पर्यटकों, कामगारों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। साइबरजाया यूनिवर्सिटी और आयुर्वेद प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के बीच शैक्षणिक सहयोग भी भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के कुआलालंपुर पहुंचने पर उनका भव्य सांस्कृतिक स्वागत किया गया। इसके बाद एमआईएनईएस इंटरनेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया गया।
इस कार्यक्रम की खास बात मलयेशिया में भारतीय समुदाय के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी और करीब 800 स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। एक ही स्थान पर इतने कलाकारों द्वारा भारतीय नृत्य प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। यह आयोजन दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक रिश्तों की जीवंत तस्वीर बना।
पी. कुमारन ने बताया कि करीब 29 लाख भारतीय मूल के लोग दोनों देशों के बीच “जीवंत सेतु” की तरह हैं, जो रिश्तों को सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहने देते।
आंकड़े भी रिश्तों की गहराई दिखाते हैं। साल 2025 में 14 लाख भारतीय पर्यटक मलयेशिया गए, जबकि करीब 3 लाख मलयेशियाई नागरिकों ने भारत की यात्रा की। इससे मलयेशिया, आसियान क्षेत्र से भारत आने वाले पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत बन गया।
हवाई संपर्क बढ़ाने और नए रूट खोलने पर भी सहमति बनी है, जिससे आने वाले वर्षों में पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और मलयेशिया के प्रधानमंत्री ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त अभ्यासों के साथ रक्षा उद्योग में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड समेत कई भारतीय कंपनियां पहले से मलयेशिया में सक्रिय हैं।
आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ रहा कोई समझौता नहीं होगा और दोहरे मानदंड स्वीकार नहीं किए जाएंगे। दोनों देशों के बीच आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए संयुक्त कार्य समूह और सुरक्षा संवाद लगातार जारी हैं।
डिजिटल भुगतान, फिनटेक और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान के साथ भारत की एक्ट ईस्ट नीति, इंडो-पैसिफिक विजन और ब्रिक्स में मलयेशिया की भागीदारी का भी जिक्र किया। यह साफ संकेत है कि भारत–मलयेशिया संबंध सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक संदर्भ में भी अहम होते जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह दौरा भारत और मलयेशिया के रिश्तों में भरोसे, सहयोग और भविष्य की साझेदारी को मजबूत करने वाला साबित हुआ है।
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