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US-Iran Conflict: Iran Offers $50 Million Reward for the Assassination of Trump!
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US-Iran Conflict: ईरान देगा ट्रंप की हत्या करने वाले को 50 मिलियन यूरो का इनाम!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sat, 16 May 2026 05:47 PM IST
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ईरान की संसद में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हत्या के बदले करोड़ों रुपये का इनाम देने से जुड़ा प्रस्ताव लाया जा सकता है। दावा है कि इस प्रस्ताव में ट्रंप के साथ-साथ इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अधिकारियों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है।
लेकिन सवाल ये है कि आखिर ईरान में ऐसी मांग क्यों उठ रही है? और क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा रणनीतिक संदेश छिपा है? क्या सचमुच ट्रंप की हत्या के लिए 50 मिलियन यूरो यानी करीब 558 करोड़ रुपये के इनाम की तैयारी हो रही है? और अगर ऐसा होता है तो क्या अमेरिका इसे सीधे युद्ध की धमकी मानेगा? क्या Netanyahu और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अन्डर्ग्रैउन्ड होने का समय आ गया है?
इनसब के इतर सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या अमेरिका-ईरान का मौजूदा संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है? खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां, परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनातनी और होरमुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता दबाव की वजह से क्या दुनिया एक नए बड़े युद्ध की तरफ बढ़ रही है?
ईरान की संसद में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हत्या के बदले 50 मिलियन यूरो यानी करीब 558 करोड़ रुपये का इनाम देने से जुड़ा प्रस्ताव लाए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रमुख Ebrahim Azizi की ओर से तैयार किए गए एक मसौदे का हिस्सा है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी आधिकारिक तौर पर पारित नहीं किया गया है, लेकिन इसकी चर्चा ने अमेरिका-ईरान संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है।
इस पूरी घटना को अंजाम देने के लिए ईरान ने एक खास प्लान तैयार किया है। ईरान की ये योजना सुनकर शायद आप भी चकमा खा जाएंगे। दरअसल, ईरान वायर और ईरान इंटरनेशनल जैसी मीडिया संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार, “काउंटर-एक्शन” नाम की एक योजना तैयार की गई है, जिसमें ट्रंप, इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम के कमांडर को निशाना बनाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरानी सुरक्षा और सैन्य एजेंसियों ने इस मसौदे को तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन इस मिशन को अंजाम देता है, तो उसे भारी आर्थिक इनाम दिया जाएगा।
इब्राहिम अजीजी ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के खिलाफ साजिशें रची हैं और इसी वजह से जवाबी कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि “यह हमारा अधिकार है कि हम अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करें।” अजीजी के बयान को ईरान के कट्टरपंथी धड़े का सबसे आक्रामक बयान माना जा रहा है।
इससे पहले भी ईरान समर्थक प्लेटफॉर्म “मसाफ” ने दावा किया था कि “किल ट्रंप” नाम के एक अंतरराष्ट्रीय अभियान के लिए 50 मिलियन डॉलर सुरक्षित रखे गए हैं। वहीं “हंडाला” नाम के एक हैकिंग ग्रुप ने भी सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उसने ट्रंप और नेतन्याहू को खत्म करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। ग्रुप ने दावा किया कि यह रकम किसी भी ऐसे व्यक्ति या समूह को दी जाएगी जो वास्तविक कार्रवाई करेगा। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
मार्च 2026 में ईरान के कई मोबाइल यूजर्स को बड़े पैमाने पर ऐसे टेक्स्ट मैसेज भी भेजे गए थे, जिनमें ट्रंप की हत्या पर इनाम की बात कही गई थी। इन मैसेजों के स्क्रीनशॉट ईरान इंटरनेशनल ने साझा किए थे। इससे यह संकेत मिला कि यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि एक बड़े प्रचार अभियान का हिस्सा भी हो सकता है।
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले कई महीनों से चरम पर है। फरवरी 2026 में शुरू हुआ सैन्य टकराव धीरे-धीरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े संकट में बदल गया। अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। इसके बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होरमुज जलडमरूमध्य में भी तनाव बढ़ गया।
हाल के हफ्तों में हालात और बिगड़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने अमेरिकी जहाजों या हितों पर हमला किया, तो उसे “पहले से कहीं ज्यादा बड़े हमलों” का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी नौसेना ने होरमुज जलडमरूमध्य में हस्तक्षेप किया तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत भी जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय तक रोक दे, जबकि ईरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं है। हाल ही में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका 20 साल तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थगित करने के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है, लेकिन इसके लिए कड़ी निगरानी और गारंटी जरूरी होगी।
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास बना हुआ है। ट्रंप ने हाल में ईरान के प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया और कहा कि ईरान अभी भी परमाणु हथियारों की दिशा में बढ़ रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध, सैन्य दबाव और खाड़ी क्षेत्र में नौसैनिक घेराबंदी उसकी संप्रभुता पर हमला हैं।
खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। होरमुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। ईरान ने हाल में यहां जहाजों से टोल वसूलने और समुद्री नियंत्रण बढ़ाने की बात कही है, जिसका अमेरिका और पश्चिमी देशों ने विरोध किया है। तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता भी इसी संकट से जुड़ी मानी जा रही है।
अमेरिका ने भी जवाबी दबाव बढ़ाते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने हाल ही में ईरान के ड्रोन नेटवर्क और वित्तीय चैनलों की जानकारी देने वालों के लिए 15 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की हत्या पर इनाम का प्रस्ताव भले ही अभी प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश हो, लेकिन इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका इस तरह की किसी भी धमकी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। यदि ईरानी संसद में यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश होता है, तो दोनों देशों के रिश्तों में नई कड़वाहट आ सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत किसी समझौते तक पहुंच पाएगी या फिर यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल जाएगा। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि पश्चिम एशिया में संकट अभी खत्म होने वाला नहीं है।
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