Bihar: छात्र आंदोलन की नई हुंकार, सोनम वांगचुक के समर्थन में मार्च; 25 जुलाई को बिहार बंद का एलान
समस्तीपुर के पूसा में आइसा और आरवाईए के बैनर तले छात्रों और युवाओं ने प्रतिरोध मार्च निकालकर सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को भंग करने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दिल्ली व पटना में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध किया।
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समस्तीपुर के पूसा में गुरुवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के बैनर तले छात्रों और युवाओं ने प्रतिरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और दिल्ली व पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का विरोध किया। संगठन ने 24 जुलाई को काला दिवस और 25 जुलाई को बिहार बंद का भी एलान किया।
उमा पांडेय कॉलेज से निकला प्रतिरोध मार्च
प्रतिरोध मार्च उमा पांडेय महाविद्यालय से शुरू हुआ। मार्च पोस्ट ऑफिस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार गोलंबर सहित विभिन्न मार्गों से होकर फिर महाविद्यालय परिसर पहुंचा, जहां सभा का आयोजन किया गया।
जमकर लगे नारे
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने "शिक्षा बचाओ, देश बचाओ", "छात्र एकता जिंदाबाद", "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो", "एनटीए को भंग करो", "लोकतंत्र पर हमला बंद करो" और "छात्रों पर दमन बंद करो" जैसे नारे लगाए।
'छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन'
सभा की अध्यक्षता आरवाईए प्रखंड सचिव डॉ. मुकेश कुमार ने की, जबकि संचालन आइसा कॉलेज इकाई सचिव रंजन कुमार ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए आरवाईए के जिला सचिव रौशन कुमार ने कहा कि देशभर के छात्र बेहतर शिक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय सरकार दमन का रास्ता अपना रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और पटना में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
'सोनम वांगचुक का आंदोलन जनसरोकारों की आवाज'
रौशन कुमार ने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन अब सिर्फ एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 24 जुलाई को काला दिवस और 25 जुलाई को बिहार बंद में अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की।
एनटीए भंग करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
आइसा के जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण, व्यापारीकरण और केंद्रीकरण गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा को मुश्किल बना रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार आंदोलन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाली नीतियां बंद की जाएं, छात्रों पर दमन रोका जाए, प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी कराई जाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग किया जाए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आइसा और आरवाईए छात्र-युवाओं के साथ मिलकर आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
बड़ी संख्या में छात्र-युवा रहे शामिल
प्रदर्शन और सभा में गणेश कुमार, मनदीप कुमार, राजीव कुमार, कुंदन कुमार, अभय यदुवंशी, सुमित पाठक, रंजन कुमार, सोनू कुमार, स्वाति कुमारी, जुली कुमारी, आरोही कुमारी, निशि कुमारी, पूजा कुमारी, प्रिया कुमारी, अनिकेत कुमार, मोनू कुमार, प्रिंस कुमार, अंशु यादव, शुभम यादव, रुपेश यादव, अनिकेत ठाकुर, हर्ष कुमार, आदित्य कुमार, मो. कुणाल, विवेक कुमार, नयन कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा मौजूद रहे।