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Bihar: अपहरण-हत्या मामले में 15 साल बाद हुआ इंसाफ, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद और 3.5 लाख का जुर्माना
Mon, 20 Jul 2026 09:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 09:32 PM IST
सार
Bihar News: बिहार के औरंगाबाद में 15 साल पुराने नाबालिग के अपहरण और हत्या के मामले में अदालत ने दोषी सुरेंद्र मेहता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर कुल 3.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामला जमीनी विवाद से जुड़ा था।
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औरंगाबाद कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार के औरंगाबाद की एक अदालत ने जमीनी विवाद में नाबालिग बच्चे के अपहरण और हत्या के 15 साल पुराने मामले में सोमवार को अभियुक्त को सख्त सजा सुनाई। लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार की अदालत ने रिसियप थाना कांड संख्या-37/11 एवं एसटीआर-319/14 में सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मामले के एकमात्र प्राथमिकी अभियुक्त को सजा सुनाई।
कोर्ट ने रिसियप थाना क्षेत्र के गड़रा निवासी सुरेंद्र मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 364 के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 302 के तहत उम्रकैद और दो लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 201 के तहत पांच वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इससे पहले 10 जुलाई को अदालत ने अभियुक्त को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था।
बारात से अगवा हुआ था मासूम
लोक अभियोजक ने बताया कि मामले की प्राथमिकी गड़रा निवासी महेंद्र मेहता ने 17 जून 2011 को दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने नाबालिग पुत्र विवेक कुमार के अपहरण का आरोप सुरेंद्र मेहता पर लगाया था। प्राथमिकी के अनुसार, घटना के दिन गांव में एक बारात आई थी, जहां विवेक बारातियों के साथ सो गया था। आरोप है कि वहीं से अभियुक्त उसे अगवा कर ले गया।
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तीन महीने बाद नहर से मिला था बच्चे का शव
प्राथमिकी दर्ज होने के करीब तीन माह बाद अपहृत नाबालिग बच्चे का शव सिंचाई नहर से बरामद किया गया था। परिजनों ने शर्ट, बेल्ट और दांत के आधार पर उसकी पहचान की थी।
यह भी पढ़ें: 1100 श्रद्धालुओं को लेकर सोमनाथ के लिए रवाना हुई स्पेशल ट्रेन, सम्राट चौधरी ने दिखाई हरी झंडी
जमीनी विवाद बना हत्या की वजह
प्राथमिकी में सूचक ने बताया था कि अभियुक्त के साथ उनका पहले से जमीनी विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी रंजिश में नाबालिग के अपहरण और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। मामले में सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया।
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कोर्ट ने रिसियप थाना क्षेत्र के गड़रा निवासी सुरेंद्र मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 364 के तहत उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 302 के तहत उम्रकैद और दो लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 201 के तहत पांच वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इससे पहले 10 जुलाई को अदालत ने अभियुक्त को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था।
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बारात से अगवा हुआ था मासूम
लोक अभियोजक ने बताया कि मामले की प्राथमिकी गड़रा निवासी महेंद्र मेहता ने 17 जून 2011 को दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने नाबालिग पुत्र विवेक कुमार के अपहरण का आरोप सुरेंद्र मेहता पर लगाया था। प्राथमिकी के अनुसार, घटना के दिन गांव में एक बारात आई थी, जहां विवेक बारातियों के साथ सो गया था। आरोप है कि वहीं से अभियुक्त उसे अगवा कर ले गया।
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तीन महीने बाद नहर से मिला था बच्चे का शव
प्राथमिकी दर्ज होने के करीब तीन माह बाद अपहृत नाबालिग बच्चे का शव सिंचाई नहर से बरामद किया गया था। परिजनों ने शर्ट, बेल्ट और दांत के आधार पर उसकी पहचान की थी।
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जमीनी विवाद बना हत्या की वजह
प्राथमिकी में सूचक ने बताया था कि अभियुक्त के साथ उनका पहले से जमीनी विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी रंजिश में नाबालिग के अपहरण और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। मामले में सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया।