Bihar: अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़, नौ गिरफ्तार, अमेरिका के ग्राहकों को बनाते थे निशाना
गयाजी के रामपुर थाना क्षेत्र स्थित मुक्ति मुनि अपार्टमेंट में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी करने वाले ग्राहकों का डेटा हासिल कर उन्हें ठगी का शिकार बनाता था।
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बिहार के गयाजी शहर में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। रामपुर थाना क्षेत्र के मुक्ति मुनि अपार्टमेंट में कथित तौर पर संचालित इस गिरोह का नेटवर्क अमेरिका समेत कई देशों और भारत के अलग-अलग राज्यों तक फैला हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों का डेटा हासिल कर उन्हें साइबर ठगी का शिकार बनाता था। पुलिस को आशंका है कि गिरोह अब तक करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है।
अमेरिकी ग्राहकों को सबसे अधिक बनाते थे निशाना
वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने बताया कि पुलिस को साइबर ठगी गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर रामपुर थाना क्षेत्र के व्हाइट हाउस कंपाउंड, रोड नंबर-6 स्थित मुक्ति मुनि अपार्टमेंट में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान नौ संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि गिरोह फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदारी करने वाले ग्राहकों का डेटा हासिल करता था। इसके बाद इसी डेटा के आधार पर ग्राहकों को निशाना बनाकर ठगी की जाती थी। गिरोह के सबसे बड़े निशाने पर अमेरिका के ग्राहक रहते थे, जबकि भारत के कई राज्यों में भी इसका नेटवर्क सक्रिय था।
9 लैपटॉप और 40 से 50 एटीएम कार्ड बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपितों के पास से नौ लैपटॉप, करीब 40 से 50 एटीएम कार्ड, कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। बरामद डिजिटल उपकरणों और अन्य सामान की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस का मानना है कि जब्त किए गए लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों की जांच से साइबर ठगी के कई मामलों और गिरोह के नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
गयाजी को बना रखा था सुरक्षित ठिकाना
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि गिरोह के सदस्य गयाजी को अपनी साइबर गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। आरोपित यहीं से बैठकर देश-विदेश में ऑनलाइन ठगी की गतिविधियों को संचालित करते थे।
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है। प्रारंभिक जांच के आधार पर अनुमान है कि गिरोह ने करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया है। हालांकि, ठगी की वास्तविक रकम और नेटवर्क की पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
नौ गिरफ्तार आरोपितों की हुई पहचान
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान नवेद अनवर, अफजल हुसैन, ओसामा परवेज, सदाशिव भान, इजमाम आलम, मो. सलमान, अदनान अहमद, जमील हुसैन और मो. शाहिद के रूप में हुई है। पुलिस सभी आरोपितों से लगातार पूछताछ कर रही है।
देश-विदेश में फैले नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, उनके वित्तीय लेन-देन और देश-विदेश में फैले नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और साइबर अपराध से अर्जित रकम को किन माध्यमों से इधर-उधर किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे इस साइबर गिरोह के खुलासे के बाद पुलिस और संबंधित केंद्रीय एजेंसियां भी मामले को लेकर सतर्क हो गई हैं। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी और साइबर ठगी के मामलों के खुलासे के लिए जांच एवं कार्रवाई जारी है।