भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: सरकार की मदद की घोषणा पर मां ने कहा- परिवार की पहली प्राथमिकता न्याय है
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। हालांकि, भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि परिवार की पहली प्राथमिकता न्याय है।
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भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पीड़ित परिवार के लिए राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर दिवंगत भरत तिवारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की है।
हालांकि, घोषणा के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने कहा कि परिवार के लिए सबसे पहले न्याय जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पहले इस मामले में संलिप्त लोगों की गिरफ्तारी होनी चाहिए और उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इसके बाद ही परिवार बैठकर सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता को लेकर आगे का निर्णय करेगा।
मालूम हो कि बीते गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर कहा था कि न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार दिवंगत भरत तिवारी के पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी बात कही गई है।
जून में एनकाउंटर के दौरान हुई थी भरत की मौत
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में जून महीने में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ के दौरान भरत तिवारी को गोली लगी थी। पुलिस का दावा था कि भरत तिवारी अवैध हथियार लेकर मौजूद थे और उन्होंने पुलिस पर फायरिंग करने का प्रयास किया था। इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उन्हें गोली लगी। गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के दौरान उनकी मौत हो गई थी।
फेसबुक लाइव वीडियो से उठे थे सवाल
घटना के बाद भरत तिवारी के सोशल मीडिया पर किए गए फेसबुक लाइव वीडियो को लेकर पुलिस के दावे पर सवाल उठे थे। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप था कि वीडियो में भरत तिवारी पुलिस के सामने सरेंडर करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे थे और उन्होंने अपनी पिस्टल पुलिस की ओर फेंक दी थी।
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इसके बाद परिवार की ओर से इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। भरत तिवारी बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आवाज उठाते थे। मामले को लेकर परिजनों और समर्थकों की ओर से लंबे समय से न्याय की मांग की जा रही थी।
सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में गठित हुआ जांच आयोग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। अब आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है। हालांकि, परिवार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनकी प्राथमिक मांग मामले में न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई है।