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Bihar Politics: तेजस्वी अपनी नई टीम कैसा बना रहे, राजद में लालू के करीबियों का क्या होगा? जानिए सब कुछ

Sun, 09 Aug 2026 12:09 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sun, 09 Aug 2026 12:09 PM IST
सार

RJD Party: बिहार की राजनीति में लंबे समय तक सत्ता में रहे राष्ट्रीय जनता दल में बदलाव को लेकर बांकीपुर उपचुनाव के बाद चर्चा में होने लगी है। खासकर जब से तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी की सारी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या तेजस्वी की नई टीम पुराने लोगों को जगह मिलेगी? परिवार और पार्टी के लोगों की क्या राय है? आइये जानते हैं सबकुछ...

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Bihar Politics: Tejashwi Yadav is building his new team Lalu Prasad upcoming elections young faces MY equation
तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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बिहार विधानसभा 2020 में 75 सीट लाकर सबसे बड़े राजनीतक दल के रूप में राजद सामने आया था। कुछ दिनों में यह संख्या 79 हो गई थी जब असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के पांच में से चार विधायक को तोड़कर राजद में मिला लिया गया। 79 विधायकों वाला राजद पांच साल बाद यानी नवंबर 2025 में ही 25 विधायकों वाला दल बनकर रह गया। तेजस्वी यादव राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए। इन 25 में एक विधायक  का झुकाव अब राजद की ओर कम और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर ज्यादा है। अगर यह विधायक एनडीए खेमे में चले गए थे नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी संकट में आ जाएगी। बांकीपुर उपचुनाव में ऐसा लग रहा था कि तेजस्वी यादव इस सीट के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। तेजस्वी देरी से चुनावी मैदान में कूदे। परिणाम यह हुआ कि राजद की उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता अपनी जमानत तक नहीं बचा पाईं। 

इस करारी हार ने राजद खेमे में भूचाल सा ला दिया। सोशल मीडिया पर कई बातें चलने लगी। मुस्लिम और यादव वोट बैंक का खिसकना, पार्टी नेताओं की कम सक्रियता, आपसी तकराव और लालू परिवार में टकराव समेत कई बातों पर सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी। इसी बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र और मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव के बीच टकराव से कार्यकर्ताओं के बीच मैसेज भी गलत गया। इस बीच तेजस्वी यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राजद की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया। अब नए सिरे से तेजस्वी यादव सबकुछ बनाएंगे।  

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'अचानक नहीं लिया गया इकाई भंग करने का फैसला'
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि पार्टी के संगठनात्मक इकाइयों का भंग करने का फैसला अचानक से नहीं लिया गया है। यह पूर्वनियोजित था। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नई टीम बनानी थी लेकिन चुनाव के कारण ऐसा नहीं पाया। इसके बाद राज्यसभा और फिर बांकीपुर उपचुनाव के कारण टीम में परिवर्तन नहीं किया गया था। अब चुनाव भी 2029 और 2030 में ही होना है। इसलिए पुरानी इकाइयों को भंग कर दिया गया। अब नई टीम बनाई जाएगी। पुरानी टीम की सभी इकाइयों के नेतृत्वकर्ताओं का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। जिसका रिपोर्ट बेहतर रहेगा, उन्हें मौका मिलेगा। टीम में युवा और सामाजिक समीकरणों का भी ख्याल रखा जाएगा। अगले एक महीने के अंदर सभी इकाइयों का गठन कर लिया जाएगा। 
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'लालू के करीबियों को जगह जरूर देंगे'
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि तेजस्वी यादव अपनी नई टीम में लालू प्रसाद के करीबियों को जगह जरूर देंगे। क्योंकि पुराने नेता पार्टी के खराब वक्त में भी साथ रहे। उनके अनुभव का लाभ पार्टी को मिलेगा। कुछ नेता ऐसे भी हैं, जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए उन्हें ऐसी जिम्मेदारी देंगे, जो कि उनके उम्र के लिहाज से फिट बैठे। साथ ही उन्हें उचित सम्मान भी मिलता रहे। तेजस्वी अपने करीबियों को जगह देने पर भी विचार कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2025 के बाद तेजस्वी के करीबियों को लेकर सवाल उठे थे। उनकी बहन रोहिणी आचार्य समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने इन पर आरोप भी लगाए थे। इस बार तेजस्वी अपनी टीम में नये चेहरे को भी तवज्जों देंगे। कुछ नेता का प्रदर्शन 2025 के विधानसभा चुनाव में अच्छा रहा था। कुछ नेता विधानसभा में हारे जरूर थे लेकिन काफी कम वोटों से। ऐसे नेताओं को भी तेजस्वी अपनी टीम में शामिल कर सकते हैं।  

तेजस्वी को क्या बदलाव करना होगा?
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने यह भी कहा कि नई टीम के साथ तेजस्वी यादव को खुद में बदलाव लाना पड़ेगा। सड़क से लेकर सदन पर उन्हें एक कुशल विपक्ष के नेता की भूमिका निभानी होगी। उन्हें मुद्दों की सियासत करनी होगी। साथ ही अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और महागठबंधन के नेताओं के साथ संवाद बढ़ाना होगा। हर एक कार्यकर्ता से कनेक्ट होना पड़ेगा। बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करनी होगी। मुस्लिम और यादव समीकरण पर मजबूत पकड़ बनानी होगी। अगड़ी जातियों पर भी फोकस करना होगा। जैसे भरत तिवारी मामले में उनके परिवार से मिलना जरूरी था। जिस तरह वह बंटी यादव के परिजनों से मिले, उसी तरह भरत तिवारी के परिजनों से भी उन्हें मिलना चाहिए था। तेजस्वी याव बुद्धिजीवियों का भी विश्वास जीतना होगा। केवल ए टू जेड की बात कहने से खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। 


क्या कह रहे राजद विधायक भाई वीरेंद्र?
भाई वीरेंद्र ने कहा कि तेजस्वी यादव के आसपास रहने वाले कुछ लोगों को हटाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, जनता उन लोगों को लेकर नाराज है और उनके प्रति असंसदीय भाषा तक का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना था कि ऐसे लोगों की वजह से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है, इसलिए नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब पार्टी को जनता के बीच जाकर फिर से विश्वास कायम करना होगा। लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना होगा और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी से बड़ी गलती हुई है, जिसे सुधारने की जरूरत है।  ऐसे नेताओं की भूमिका की समीक्षा होनी चाहिए। उनका कहना था कि संगठन को नए सिरे से खड़ा करने और जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन करने का समय आ गया है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी को अब ऐसे लोगों को मुख्यधारा में लाना चाहिए, जिनकी जनता के बीच अच्छी स्वीकार्यता है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के आसपास भी ऐसे लोगों को जगह मिलनी चाहिए, जो संगठन को मजबूत करने में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।

मीसा भारती और रोहिणी आचार्य ने क्या कहा?
बांकीपुर उपचुनाव में मिली हार पर राजद सांसद मीसा भारती ने कहा कि यह पार्टी के लिए चिंता की बात है और नेतृत्व को हार पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं,  रोहिणी आचार्य ने अपने भाई और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा, जीत उसी की होती है जो लगातार लड़ता है, जनता से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि पार्टी की जिन इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने का निर्णय लिया गया, वह फैसला काफी पहले ही लिया जाना चाहिए था। उम्मीद है कि नई इकाइयों के पुनर्गठन में कट्टर लालूवादियों, वर्षों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं, संगठन की गहरी समझ रखने वाले तथा जमीन से जुड़े जुझारू लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जमीन से जुड़े लोगों तथा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर खड़े समाज के लोगों को आगे बढ़ाना, कार्यकर्ताओं को उचित अवसर और सम्मानजनक जिम्मेदारी देना हमेशा से लालू प्रसाद यादव की प्राथमिकता रही है। पार्टी की मजबूती और बेहतरी भी उनके सिद्धांतों तथा दिखाए गए मार्ग पर चलकर ही सुनिश्चित की जा सकती है।          

2005 से अब तक बिहार विधानसभा चुनाव में राजद का प्रदर्शन

चुनाव वर्ष राजद की जीती सीटें वोट शेयर प्रदर्शन
फरवरी 2005 75 25.07% सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन सरकार नहीं बना सकी
अक्टूबर-नवंबर 2005 54 23.45% 21 सीटों का नुकसान, सत्ता से बाहर
2010 22 18.84% बड़ी हार, NDA की प्रचंड जीत
2015 80 करीब 18.4% शानदार वापसी, सबसे बड़ी पार्टी
2020 75 23.11% सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन सरकार नहीं बना सकी
2025 25 22.99% सीटों में बड़ी गिरावट

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