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Bihar: कारगिल में छुड़ाए थे पाक सैनिकों के छक्के, विद्यानंद सिंह की शहादत पर गर्व महसूस करती है यहां की धरती

Sun, 26 Jul 2026 12:20 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोजपुर Published by: पटना ब्यूरो Updated Sun, 26 Jul 2026 12:20 PM IST
सार

कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भोजपुर के वीर सपूत विद्यानंद सिंह ने 7 जून 1999 को मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। आज भी भोजपुर समेत पूरा बिहार उनकी वीरता और शहादत को गर्व के साथ याद करता है। उनके सम्मान में गांव पनपुरा में शहीद स्मारक बनाया गया है, जहां हर वर्ष श्रद्धांजलि दी जाती है।

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Kargil War Hero lal Vidyanand Singh Remembering the Courageous Martyr From Bihar’s Bhojpur
भोजपुर की मिट्टी के लाल विद्यानंद सिंह व परिवार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भोजपुर वीरों की धरती है। यहां के सपूतों ने कभी पीठ नहीं दिखाई। इसी धरती के महान योद्धा बाबू वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। कारगिल युद्ध में जब भारत माता के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने की बारी आई, तब भोजपुर की मिट्टी के लाल विद्यानंद सिंह ने अपने जोश, जज्बे, साहस एवं पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तान के सैनिकों से लोहा लिया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।

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भोजपुर के लोग स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं
सात जून 1999 वह दिन था, जब कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को करारी शिकस्त दिलाने के दौरान भोजपुर के वीर सपूत विद्यानंद सिंह ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज भी कारगिल युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए हंसते-हंसते प्राण न्योछावर करने वाले शहीद विद्यानंद सिंह को नमन कर भोजपुर के लोग स्वयं को गौरवान्वित महसूस करते हैं। इस वीर सपूत को याद कर आज भी जिले के लोगों का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। शहीद विद्यानंद सिंह का जन्म 12 जनवरी 1966 को भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र के पनपुरा गांव में हुआ था। उनके पिता सकलदीप सिंह और माता लक्ष्मीना देवी एक साधारण किसान परिवार से थे। उनके चाचा स्वर्गीय चन्द्रदीप सिंह तथा चचेरे भाई रामप्रसाद सिंह भी भारतीय सेना में थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर विद्यानंद सिंह ने भी भारतीय सेना में शामिल होने का संकल्प लिया।
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सरकार ने पेट्रोल पंप किया था आंवटित
वर्तमान में शहीद की धर्मपत्नी पार्वती देवी अपने परिवार के साथ हजारीबाग में रहती हैं। सरकार द्वारा उनके नाम पर एक पेट्रोल पंप आवंटित किया गया है, जो 'कारगिल प्वाइंट' के नाम से संचालित होता है। इसके अलावा 'शहीद विद्यानंद सिंह एजुकेशनल एंड सोशल फाउंडेशन' के नाम से एक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) भी संचालित की जा रही है। शहीद के दो पुत्र थे। बड़े पुत्र शिवशंकर सिंह की पिछले वर्ष एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद छोटे पुत्र रविशंकर सिंह हजारीबाग में व्यवसाय कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। शहीद विद्यानंद सिंह की स्मृति में उनके पैतृक गांव पनपुरा में वर्ष 2003 में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया। यहां प्रत्येक वर्ष उनके शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया जाता है।

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