Delhi EV Policy: सभी वाहन ईवी बने तो बढ़ेगी 2,000-2,700 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग, सरकार ने यह कहा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन वाहनों को चार्ज करने के लिए अतिरिक्त बिजली की जरूरत कैसे पूरी होगी।
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राजधानी में प्रदूषण कम करने के मकसद से दिल्ली सरकार परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। जैसे-जैसे पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन लेंगे, वैसे-वैसे बिजली व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ेगा। राजधानी में यदि कुल निजी (दो पहिया और चार पहिया) और तीन पहिया समेत करीब 83 लाख पेट्रोल, डीजल के वाहन ईवी में बदल जाएं तो मौजूदा जरूरत के साथ कुल 2,000-2,700 मेगावाट बिजली की अतिरिक्त जरूरत होगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन वाहनों को चार्ज करने के लिए अतिरिक्त बिजली की जरूरत कैसे पूरी होगी।
हालांकि दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री आशीष सूद का कहना है कि दिल्ली सरकार मास्टर प्लान 2030 के तहत 17 हजार करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी पर खर्च करके इस जरूरत को पूरा करेगी।
दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति को प्रभावी बनाने के लिए 30 हजार ईवी चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क तैयार किया जाना है और घरों में ईवी चार्जिंग के लिए अतिरक्ति बिजली की व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए राजधानी में बिजली आपूर्ति करने वाली तीनों कंपनियों बीएसईएस, टीपीडीडीएल और एनडीएमसी को तीन गुना से भी ज्यादा अपना नेटवर्क बढ़ाना होगा और ग्रिड से अतिरक्त बिजली खरीदनी पड़ेगी।
हालांकि बढ़ती बिजली की जरूरत पर बिजली मंत्री आशीष सूद का कहना है कि बिजली की बढ़ती मांग को लेकर प्रत्येक वर्ष इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में 2026-27 में पीक पावर डिमांड 9000 मेगावाट तक जाने का अनुमान लगाया है। 2030-31 तक ये 13,114 मेगावाट तक पहुंचेगी। इसके लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतम ट्रांसफार्मर जो 25 वर्ष की समय सीमा पूरी कर चुके हैं, सरकार उन्हें नए सिरे से बदलने की योजना पर काम कर रही है। मिशन 2030 के अंतर्गत यह सारे कार्य किए जाएंगे।
राजधानी में कितने वाहन
- दोपहिया-- 59.27 लाख
- चार पहिया-- कार 20.88 लाख
- तीन पहिया-- 3 लाख अनुमान (बाकी 10 लाख में ऑटो-टैक्सी)
- कुल निजी-- 83 लाख
भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई पॉलिसी
भविष्य को ध्यान में रखकर यह पॉलिसी बनाई गई है। यह दूसरे राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है। आने वाले कुछ वर्षों में दिल्ली में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण में कमी आ सकती है। इंडो-गैंगेटिक मैदानी इलाकों के राज्यों को, जहां सर्दियों में प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है, इसी तरह के तरीके से फायदा हो सकता है। हालांकि, इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होना जरूरी है।
-शरीफ कमर, फेलो और एसोसिएट डायरेक्टर द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी)
ईवी नीति 2.0 से सड़कों पर बदलाव की लिखी जाएगी नई पटकथा
नई ईवी नीति 2.0 केवल इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर मिलने वाली सब्सिडी या प्रोत्साहन तक सीमित नहीं है। सरकार इसे 2030 तक राजधानी के परिवहन तंत्र में चरणबद्ध बदलाव की योजना के रूप में पेश कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2020 की ईवी नीति ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की शुरुआत की थी लेकिन सिर्फ प्रोत्साहन से लक्ष्य हासिल नहीं हो सकता था। इसी कारण नई नीति में विभिन्न वाहन श्रेणियों के लिए चरणबद्ध अनिवार्य विद्युतीकरण, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और मालवाहक वाहनों के लिए पहले से अधिक प्रोत्साहन दिया गया है। साथ ही पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2027 से नए एल-5 श्रेणी के ऑटो और एन-1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक होगा, जबकि अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी में किया जाएगा। नई नीति में पहली बार स्कूल बसों के विद्युतीकरण, बड़े पैमाने पर चार्जिंग नेटवर्क, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को नोडल एजेंसी बनाने जैसे प्रावधान हैं। बैटरी ट्रेसबिलिटी, कलेक्शन सेंटर, एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (ईपीआर) और पीपीपी मॉडल के जरिये बैटरी प्रबंधन की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई कमेटियों का होगा गठन
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में दिल्ली ईवी एपेक्स कमेटी, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर्ड कमेटी और समर्पित ईवी सेल का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई नीति के लिए वित्तीय संसाधनों का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब राज्य सरकार के बजट के साथ केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और अन्य स्रोतों से भी धन उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि दिल्ली में स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था विकसित करना है।