अभियान: दिल्ली की धरोहरों के संरक्षण में निजी क्षेत्र की एंट्री, पांच साल के लिए गोद लिए जा सकेंगे स्मारक
मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दो योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं में दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना और दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना शामिल है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी की ऐतिहासिक विरासत को नया जीवन देने की दिशा में दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दो योजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं में दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना और दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना शामिल है। इन्हें हमारे स्मारक, हमारा गौरव अभियान के तहत चलाया जाएगा। इसके तहत राजधानी के स्थानीय महत्व के 75 ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और विकास में निजी कंपनियों, ट्रस्ट, एनजीओ, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
दिल्ली में सैकड़ों ऐतिहासिक इमारतें, बावड़ियां, मकबरे, किले और स्मारक हैं जिनमें से कई मुख्य पर्यटन स्थलों की सूची से बाहर हैं और वर्षों से सीमित संसाधनों के कारण उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि यदि निजी संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बढ़ेगी तो इन धरोहरों का संरक्षण अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगा। हर स्मारक के लिए दिल्ली सरकार, संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी और स्मारक मित्र के बीच त्रिपक्षीय एमओयू होगा। इच्छुक संस्थाओं को ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) के साथ एक विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट भी जमा करना होगा, जिसमें प्रस्तावित विकास कार्य, पर्यटक सुविधाएं और रखरखाव की योजना का विवरण देना होगा। इस योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा होगी। पर्यटकों और अन्य हितधारकों से मिले फीडबैक पर मूल्यांकन किया जाएगा।
पांच साल के लिए गोद लिए जा सकेंगे स्मारक
दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना : सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), निजी कंपनियां, पंजीकृत एनजीओ, ट्रस्ट, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले 75 ऐतिहासिक स्मारकों को पांच वर्ष के लिए गोद ले सकेंगे। योजना के तहत इन्हें ‘स्मारक मित्र’ का दर्जा दिया जाएगा। स्मारक मित्र अपने संसाधनों से स्मारकों की साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड शो, पर्यटक सुविधाओं के विकास, संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च वहन करेंगे। सरकार के अनुसार इससे प्रत्येक स्मारक पर लगभग 4.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की सरकारी बचत होगी।
संरक्षण कार्यों के लिए दो करोड़ तक का अनुदान
दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना : स्मारकों के मूल संरक्षण, जीर्णोद्धार और तकनीकी संरक्षण कार्यों के लिए पात्र संस्थाओं को अधिकतम दो करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का लाभ राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पंजीकृत स्वैच्छिक संगठन, ट्रस्ट, फाउंडेशन, विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के स्वायत्त संस्थान उठा सकेंगे। स्वैच्छिक संस्थाओं के लिए भारत सरकार के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
निजी लाभ नहीं कमा सकेंगे
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी स्वीकृत कार्यक्रम या आयोजन से आय होती है, तो उसका उपयोग केवल उसी स्मारक के रखरखाव और विकास पर किया जाएगा। संबंधित संस्था उस राशि को निजी लाभ के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकेगी।
रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का दावा है कि दोनों योजनाओं से कुशल और अर्द्धकुशल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पारंपरिक शिल्पकारों को काम मिलेगा, युवाओं और विश्वविद्यालयों की भागीदारी बढ़ेगी तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। कम चर्चित ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
इन दोनों योजनाओं से कुशल, अर्धकुशल और पेशेवर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उन्हें जनभागीदारी के माध्यम से जीवंत सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
--रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार की सूची में शामिल 75 धरोहरों में सबसे अधिक 26 मकबरे एवं गुंबद, 6 ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, 4 कोस मीनार, 3 बावलियां, 3 मस्जिदें, 2 सराय, 2 बारादरी, 2 महल, 2 बाग सहित हवेली, पुस्तकालय भवन, घुड़साल, इमामबाड़ा, बुर्ज और अन्य ऐतिहासिक संरचनाएं शामिल हैं।