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Ghaziabad News: फिर जहरीली हुई लोनी की हवा, एक्यूआई 300 के पार
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साहिबाबाद। लोनी में हवा की गुणवत्ता एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। रविवार शाम यूपीपीसीबी के समीर एप पर जारी बुलेटिन में गाजियाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 229 और लोनी का 318 दर्ज किया गया। इस तरह गाजियाबाद देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि लोनी का एक्यूआई देश के सभी जनपदों से सर्वाधिक रहा।
लोनी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पिछले एक सप्ताह में 40 से अधिक अवैध फैक्टरियां सील की गई हैं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। क्षेत्र में टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल और कूड़े में लगने वाली आग प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं। अनुकूल मौसम के बावजूद लोनी का एक्यूआई रेड जोन में दर्ज होना चिंता का विषय है।
हाल ही में आई एक सर्वे रिपोर्ट में भी लोनी को विश्व के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल बताया गया है। इसके बाद से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मौजूद कई कारक स्थिति को बिगाड़ रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह के अनुसार, लोनी में प्रदूषण के कई स्रोत हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण सड़कों की धूल है। हवा चलने पर यह धूल वातावरण में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा बढ़ा देती है। उन्होंने बताया कि एक्यूआई को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।
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लोनी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए पिछले एक सप्ताह में 40 से अधिक अवैध फैक्टरियां सील की गई हैं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। क्षेत्र में टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल और कूड़े में लगने वाली आग प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं। अनुकूल मौसम के बावजूद लोनी का एक्यूआई रेड जोन में दर्ज होना चिंता का विषय है।
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हाल ही में आई एक सर्वे रिपोर्ट में भी लोनी को विश्व के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल बताया गया है। इसके बाद से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मौजूद कई कारक स्थिति को बिगाड़ रहे हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह के अनुसार, लोनी में प्रदूषण के कई स्रोत हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण सड़कों की धूल है। हवा चलने पर यह धूल वातावरण में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा बढ़ा देती है। उन्होंने बताया कि एक्यूआई को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।