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Gorakhpur News: 20 राज्यों के 130 शिक्षकों ने सीखी उच्च शिक्षा की नई तकनीकें
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ऑनलाइन फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम का समापन आज
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में चार सप्ताह से चल रहे 12वें ऑनलाइन फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु-दक्षता) का समापन 11 अगस्त को होगा। समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी मुख्य अतिथि होंगे।
15 जुलाई से चल रहे प्रशिक्षण में देश के 20 से अधिक राज्यों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के 130 नव नियुक्त शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 90 से अधिक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें डिजिटल पेडागॉजी, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शोध पद्धति, प्लेजरिज्म, अकादमिक इंटीग्रिटी, पाठ्यक्रम विकास, पर्यावरण, नवाचार और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों जैसे विषय शामिल रहे।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि गुरु-दक्षता का उद्देश्य नव नियुक्त शिक्षकों को बदलते उच्च शिक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के साथ संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम के पाठ्यक्रम समन्वयक वाणिज्य विभाग के प्रो. अनिल यादव हैं।
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में चार सप्ताह से चल रहे 12वें ऑनलाइन फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु-दक्षता) का समापन 11 अगस्त को होगा। समापन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी मुख्य अतिथि होंगे।
15 जुलाई से चल रहे प्रशिक्षण में देश के 20 से अधिक राज्यों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के 130 नव नियुक्त शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 90 से अधिक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें डिजिटल पेडागॉजी, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शोध पद्धति, प्लेजरिज्म, अकादमिक इंटीग्रिटी, पाठ्यक्रम विकास, पर्यावरण, नवाचार और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों जैसे विषय शामिल रहे।
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एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि गुरु-दक्षता का उद्देश्य नव नियुक्त शिक्षकों को बदलते उच्च शिक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों के साथ संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम के पाठ्यक्रम समन्वयक वाणिज्य विभाग के प्रो. अनिल यादव हैं।
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