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Gorakhpur News: स्मृति के समाप्त होने पर मनुष्य व्यर्थ हो जाता है
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डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में आयोजित हुआ पुरातन छात्र सम्मेलन
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पुरातन छात्र एवं शिक्षक पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि स्मृतियों को जिंदा रखना बहुत जरूरी है। जीवन स्मृति ही है। स्मृति के अलावा जीवन कुछ नहीं, स्मृति के समाप्त होने पर मनुष्य व्यर्थ हो जाता है।
पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी बृहस्पतिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क की यह प्रवृत्ति है कि वह अपनी गलती नहीं मानता है और बुरी स्मृतियों को याद रखता है तथा अच्छी स्मृतियों को भुला देता है। यह मनुष्य का नहीं, मस्तिष्क का दोष है। हमें निरंतर इस दोष से पार पाने की कोशिश करते रहना चाहिए। ऐसा करके जीवन के नजदीक पहुंचा जा सकता है।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि हिंदी विभाग की गौरवशाली परंपरा है। यहां के पुरातन छात्रों ने बड़ी लकीर खींची है। उनसे संवाद, समन्वय व संवेदनात्मक जुड़ाव आवश्यक है। मौजूदा पीढ़ी को उनसे निरंतर मार्गदर्शन हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्मान व प्रोत्साहन स्वस्थ्य समाज की निशानी है और पुरातन छात्र सम्मेलन इसका सुंदर उदाहरण है।
इस अवसर पर प्रो. अनंत मिश्र, प्रो. रामदरश राय, प्रो. अरविंद त्रिपाठी, प्रो. अनिल राय, रंजना जायसवाल, प्रभा सिंह समेत विभिन्न युवा पुरातन छात्रों ने भी अपनी स्मृतियों को साझा किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्रा ने स्वागत वक्तव्य दिया और संचालन प्रो. राजेश मल्ल, आभार ज्ञापन डॉक्टर सुनील यादव ने किया। इस अवसर पर सन 1957 से लेकर मौजूदा सत्र के विद्यार्थी मौजूद रहे।
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पुरातन छात्र एवं शिक्षक पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि स्मृतियों को जिंदा रखना बहुत जरूरी है। जीवन स्मृति ही है। स्मृति के अलावा जीवन कुछ नहीं, स्मृति के समाप्त होने पर मनुष्य व्यर्थ हो जाता है।
पद्मश्री प्रोफेसर विश्वनाथ प्रसाद तिवारी बृहस्पतिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क की यह प्रवृत्ति है कि वह अपनी गलती नहीं मानता है और बुरी स्मृतियों को याद रखता है तथा अच्छी स्मृतियों को भुला देता है। यह मनुष्य का नहीं, मस्तिष्क का दोष है। हमें निरंतर इस दोष से पार पाने की कोशिश करते रहना चाहिए। ऐसा करके जीवन के नजदीक पहुंचा जा सकता है।
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सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि हिंदी विभाग की गौरवशाली परंपरा है। यहां के पुरातन छात्रों ने बड़ी लकीर खींची है। उनसे संवाद, समन्वय व संवेदनात्मक जुड़ाव आवश्यक है। मौजूदा पीढ़ी को उनसे निरंतर मार्गदर्शन हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्मान व प्रोत्साहन स्वस्थ्य समाज की निशानी है और पुरातन छात्र सम्मेलन इसका सुंदर उदाहरण है।
इस अवसर पर प्रो. अनंत मिश्र, प्रो. रामदरश राय, प्रो. अरविंद त्रिपाठी, प्रो. अनिल राय, रंजना जायसवाल, प्रभा सिंह समेत विभिन्न युवा पुरातन छात्रों ने भी अपनी स्मृतियों को साझा किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्रा ने स्वागत वक्तव्य दिया और संचालन प्रो. राजेश मल्ल, आभार ज्ञापन डॉक्टर सुनील यादव ने किया। इस अवसर पर सन 1957 से लेकर मौजूदा सत्र के विद्यार्थी मौजूद रहे।
