UP: बैंक की किस्तों के बोझ ने छीन लिया परिवार का सहारा, सवा लाख की सैलरी में तीन लाख की ईएमआई का था दबाव
पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह ने आत्महत्या कर ली। उन पर 1.40 करोड़ रुपये का कर्ज और तीन लाख रुपये मासिक ईएमआई का भारी दबाव था। ठग गरिमा सिंह ने उनसे लोन निकलवाकर ठगी की थी। गरिमा लोगों को अधिक लोन दिलाने के नाम पर फंसाकर ठगी करती थी।
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राजेंद्र नगर कॉलोनी के बसंत इंक्लेव की दूसरी मंजिल पर रहने वाले पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह का परिवार अब उस सवाल के साथ खड़ा है, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है। पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह के मुताबिक, कर्ज और भारी ईएमआई ने परमात्मा को भीतर तक तोड़ दिया था। सवा लाख रुपये की मासिक सैलरी के मुकाबले तीन लाख रुपये की ईएमआई का दबाव उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। बैंक से आने वाले फोन ने उनकी चिंता और बढ़ा दी थी।
सुमित्रा के मुताबिक, परमात्मा से ठग गरिमा सिंह ने बैंक से 1.40 करोड़ लोन निकलवाकर ठगी कर ली थी। इसके बाद कर्ज की अदायगी का बोझ उनके सामने खड़ा हो गया। वह अक्सर कहते थे कि सवा लाख रुपये की सैलरी में तीन लाख रुपये की ईएमआई कैसे भरेंगे। परिवार का खर्च कैसे चलेगा। इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए मुश्किल था। पत्नी के अनुसार, इसी चिंता के चलते वह डिप्रेशन में रहने लगे थे।
बेटे का शव देख माता-पिता फूट-फूटकर रोए
घटना की सूचना मिलने पर परमात्मा के पिता पारस नाथ सिंह और मां कुंती सिंह मऊ से गोरखपुर पहुंचे। बेटे का शव देखते ही दोनों फूट-फूटकर रोने लगे। परिजन और आसपास के लोगों ने किसी तरह उन्हें संभाला। पिता बीपी और मां हृदय रोग से पीड़ित हैं। इधर, इकलौते भाई की मौत की खबर सुनकर शहर में रहने वाली बहनें आभा और रंजना भी बदहवास भाई के घर पहुंच गईं। उनका कहना था कि भाई अगर कर्ज और ईएमआई के दबाव में था तो परिवार से अपनी परेशानी साझा कर सकता था। कोई न कोई रास्ता जरूर निकलता। इतनी बड़ी परेशानी को अकेले झेलने की जरूरत नहीं थी।
लोन के लिए करती थी लोगों का ब्रेनवॉश
एम्स थाना क्षेत्र की महादेवी झारखंडी कॉलोनी निवासी ध्रुव नारायण सिंह की बेटी गरिमा सिंह की शादी वर्ष 2020 में कुशीनगर के सुकरौली निवासी भानू प्रताप सिंह से हुई थी। भानू ठेकेदारी करते थे। काम कमजोर होने पर करीब दो साल पहले वह पत्नी और दो बच्चों के साथ ससुर के मकान में आकर रहने लगे। गरिमा के दो बेटे हैं, जिनमें एक तीन साल और दूसरा महज तीन महीने का है। पुलिस के मुताबिक, गरिमा को जल्द अमीर बनने की चाहत थी। उसने ठगी की तरकीब जानने के लिए इंटरनेट और यूट्यूब पर भी जानकारी जुटाई।
इसके बाद बैंक से लोन दिलाने के नाम पर लोगों को जाल में फंसाने की योजना बनाई। शुरुआत उसने अपने परिचितों से की और इसमें अपने पिता को भी शामिल कर लिया। गरिमा ऐसे लोगों को तलाशती थी, जिन्हें लोन की जरूरत हो या जो पहले से कर्ज ले चुके हों। इसके बाद वह उन्हें अधिक लोन लेने के लिए तैयार करती थी। वह भरोसा दिलाती थी कि लोन की किस्त वह खुद चुकाएगी। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद रकम का महज 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा संबंधित व्यक्ति को देती और बाकी रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करा लेती थी। इसी तरीके से उसने कई लोगों को अपने जाल में फंसाया।
आरोपी गरिमा ने डायरी में लिखा- अप्रैल तक अरबपति बनूंगी
पुलिस को आरोपी गरिमा के पास से एक डायरी भी मिली है। इसमें उसने अपने बड़े आर्थिक लक्ष्य लिख रखे थे। एक पन्ने पर लिखा है- ‘मैं गरिमा सिंह, अप्रैल 2026 तक अरबपति बनूंगी। यह मेरा लक्ष्य है। मेरे सभी लोन अप्रैल से मई तक खत्म हो जाएंगे। अप्रैल से मई तक मेरा लक्ष्य 100 करोड़ रुपये कमाना है। गरिमा सिंह करोड़पति है। धन्यवाद भगवान।’पुलिस के अनुसार, गरिमा इसी तरह की बातें रोज डायरी में लिखती थी। वह अपने लक्ष्य को लेकर खुद को लगातार प्रेरित करती थी और हर दिन भगवान को धन्यवाद भी देती थी।