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संशोधित : कुलपति के समर्थन में 250 से अधिक शिक्षक एकजुट

Fri, 14 Aug 2026 02:42 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 02:42 AM IST
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Retired teachers, former Vice-Chancellors, and staff members also extended their support.
- सेवानिवृत्त शिक्षकों, पूर्व कुलपतियों और कर्मचारियों ने भी जताया समर्थन
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन के साथ परिसर में गुऑक्टा के विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित अमर्यादित व्यवहार के विरोध में विश्वविद्यालय के 250 से अधिक शिक्षक एकजुट हुए। उन्होंने बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि एक प्रस्ताव तैयार कर राज्यपाल को भेजा जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।
बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय के मेन गेट पर एकत्र शिक्षकों ने घटना की निंदा करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की। शिक्षकों ने एसडीएम की ओर से भेजे गए अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुलपति के साथ अभद्र एवं अमर्यादित व्यवहार किया गया। हाथापाई का प्रयास और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग हुआ। ज्ञापन में कुलपति की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ भी कथित दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की का उल्लेख किया गया है।
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शिक्षकों ने कहा कि कुलपति की गाड़ी के सामने कुछ शिक्षकों के लेट जाने के कारण उन्हें विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ कुलपति आवास तक पैदल जाना पड़ा। कुलपति के समर्थन में जुटे शिक्षकों में प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. अजय शुक्ला, प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. आलोक गोयल, प्रो. आरपी सिंह, प्रो. अहमद नदीम, प्रो. सुभी धूसिया, प्रो. सुषमा पांडेय और प्रो. दिव्या रानी सिंह समेत अधिष्ठाता, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और विभिन्न विभागों के शिक्षक शामिल रहे।
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सेवानिवृत्त शिक्षकों और विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपतियों ने भी कुलपति के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन और विरोध लोकतंत्र का अधिकार है लेकिन इसकी अभिव्यक्ति में संस्थागत गरिमा बनाए रखना भी जरूरी है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भी शिक्षकों के साथ ज्ञापन सौंपा और कुलपति कार्यालय तक मार्च कर कुलपति से मुलाकात की। स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भी कुलपति के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महाविद्यालयों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
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