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बदल रहा है गोरखपुर: 30 एफपीओ के सहयोग से सीबीजी प्लांट को मिलेंगे पराली और गोबर
Wed, 27 Dec 2023 03:18 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 27 Dec 2023 03:18 PM IST
सार
धुरियापार में सीबीजी प्लांट को पराली आपूर्ति के लिए देवरिया में पांच एफपीओ का चयन किया गया है। गरहज, रुद्रपुर, गौरीबाजार, देवरिया और सलेमपुर में तहसील स्तर पर एफपीओ किसानों से पराली इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचाएगी।
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पराली
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में धुरियापार चीनी मिल की जमीन पर में बने कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजी) का ट्रायल रन शुरू हो गया है। प्लांट तक किसानों के खेतों में उपलब्ध फसल अवशेष एवं गोबर को खरीद कर पहुंचाने के लिए गोरखपुर समेत आसपास जिलों में 30 कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का चयन किया गया है। कंपनी ने प्रेस मड एवं पराली उपलब्ध कराने को दो कांट्रेक्टर नियुक्त किए हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 18 सितंबर 2019 को सीबीजी प्लांट का शिलान्यास किया था। इस प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रतिदिन 230 टन पराली एवं प्रेस मड चाहिए।
किसानों के पराली जलाने पर लगेगा अंकुश
फसल की कटाई के बाद खेत से पराली के निस्तारण के लिए किसानों को मशक्कत करने से छुटकारा मिल जाएगा। बायोगैस बनाने के लिए गोबर, पुआल, गन्ना पेराई के बाद निकलने वाली खोइया व धान कुटाई के बाद निकलने वाली भूसी का इस्तेमाल किया जाएगा। बायोगैस बनने के बाद जो खाद निकलेगी, उसे किसान प्लांट से सीधे खरीद सकेंगे। इसकी कीमत सामान्य रहेगी। किसान खाद खरीदकर खेतों में डाल सकेंगे।
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स्वदेशी तकनीक से होगा गैस का उत्पादन
बायोगैस को इंडि ग्रीन नाम दिया गया है। यह सीएनजी जैसी ही होगी। गैस में मीथेन की मात्रा 94 फीसदी है, जो वाहनों को अच्छी माइलेज देगी। स्वदेशी तकनीक से गैस का उत्पादन होगा। आईओसीएल की रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम ने सब कुछ डिजाइन किया है।
देवरिया में पांच एफपीओ का हुआ है चयन
धुरियापार में सीबीजी प्लांट को पराली आपूर्ति के लिए देवरिया में पांच एफपीओ का चयन किया गया है। गरहज, रुद्रपुर, गौरीबाजार, देवरिया और सलेमपुर में तहसील स्तर पर एफपीओ किसानों से पराली इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचाएगी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 18 सितंबर 2019 को सीबीजी प्लांट का शिलान्यास किया था। इस प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए प्रतिदिन 230 टन पराली एवं प्रेस मड चाहिए।
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किसानों के पराली जलाने पर लगेगा अंकुश
फसल की कटाई के बाद खेत से पराली के निस्तारण के लिए किसानों को मशक्कत करने से छुटकारा मिल जाएगा। बायोगैस बनाने के लिए गोबर, पुआल, गन्ना पेराई के बाद निकलने वाली खोइया व धान कुटाई के बाद निकलने वाली भूसी का इस्तेमाल किया जाएगा। बायोगैस बनने के बाद जो खाद निकलेगी, उसे किसान प्लांट से सीधे खरीद सकेंगे। इसकी कीमत सामान्य रहेगी। किसान खाद खरीदकर खेतों में डाल सकेंगे।
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स्वदेशी तकनीक से होगा गैस का उत्पादन
बायोगैस को इंडि ग्रीन नाम दिया गया है। यह सीएनजी जैसी ही होगी। गैस में मीथेन की मात्रा 94 फीसदी है, जो वाहनों को अच्छी माइलेज देगी। स्वदेशी तकनीक से गैस का उत्पादन होगा। आईओसीएल की रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम ने सब कुछ डिजाइन किया है।
देवरिया में पांच एफपीओ का हुआ है चयन
धुरियापार में सीबीजी प्लांट को पराली आपूर्ति के लिए देवरिया में पांच एफपीओ का चयन किया गया है। गरहज, रुद्रपुर, गौरीबाजार, देवरिया और सलेमपुर में तहसील स्तर पर एफपीओ किसानों से पराली इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचाएगी।