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Gorakhpur News: बीआरडी की इमरजेंसी के बाहर ताक में रहते हैं बिचौलिए...मौका मिलते ही मरीज पार
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मेडिकल कॉलेज में लगातार कार्रवाई के बावजूद बाज नहीं आ रहे मरीज माफिया
मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक है मरीज माफिया का नेटवर्क
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लगातार कार्रवाई के बावजूद मरीज माफिया बाज नहीं आ रहे। निजी अस्पतालों से जुड़े बिचौलिए बीआरडी की इमरजेंसी के आसपास घूमकर मरीजों के तीमारदारों को बहलाने-फुसलाने में जुट जाते हैं और मौका मिलते ही उन्हें निजी अस्पतालों में भेज दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अब ये बिचौलिए सीधे एंबुलेंस के साथ अस्पताल परिसर में नहीं आते, बल्कि उसे थोड़ी दूरी पर खड़ी कर देते हैं। खुद या अपने किसी आदमी को इमरजेंसी के आसपास सक्रिय कर देते हैं। जैसे ही कोई गंभीर मरीज आता है, उससे जुड़े लोग तत्काल सूचना देकर बिचौलियों को सतर्क कर देते हैं। इसके बाद तीमारदारों को यह कहकर डराया जाता है कि यहां इलाज संभव नहीं है और मरीज की जान खतरे में है। तनाव में आए परिजन जब सहमत होते हैं, तो कुछ ही मिनटों में एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाती है और मरीज को निजी अस्पताल भेज दिया जाता है।
बताया जा रहा है कि मरीज माफिया का नेटवर्क मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक फैला है। यह नेटवर्क कमीशन के बलबूते चलता है। पुलिस ने इस पर सख्ती दिखाते हुए पिछले 13 दिन में पांच निजी एंबुलेंस सीज की हैं। हाल ही में ट्रामा सेंटर और मेडिकल कॉलेज परिसर से कई एंबुलेंस पकड़ी गईं। एक मामले में चालक पुलिस को देखकर वाहन छोड़कर भाग गया था।
सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दुकानों पर होती है प्लानिंग
बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया के बिचौलिए रात में ही सक्रिय होते हैं। दिन में वह बाहर की दुकानों पर बैठकर प्लानिंग करते हैं। शाम होते ही वह अलग-अलग जगहों पर घूमते रहते हैं। दूसरे जिलों और बिहार से रेफर होकर आने वाले मरीजों को ही वह टारगेट करते हैं क्योंकि उनको शहर के बारे में जानकारी नहीं होती।
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मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक है मरीज माफिया का नेटवर्क
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लगातार कार्रवाई के बावजूद मरीज माफिया बाज नहीं आ रहे। निजी अस्पतालों से जुड़े बिचौलिए बीआरडी की इमरजेंसी के आसपास घूमकर मरीजों के तीमारदारों को बहलाने-फुसलाने में जुट जाते हैं और मौका मिलते ही उन्हें निजी अस्पतालों में भेज दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अब ये बिचौलिए सीधे एंबुलेंस के साथ अस्पताल परिसर में नहीं आते, बल्कि उसे थोड़ी दूरी पर खड़ी कर देते हैं। खुद या अपने किसी आदमी को इमरजेंसी के आसपास सक्रिय कर देते हैं। जैसे ही कोई गंभीर मरीज आता है, उससे जुड़े लोग तत्काल सूचना देकर बिचौलियों को सतर्क कर देते हैं। इसके बाद तीमारदारों को यह कहकर डराया जाता है कि यहां इलाज संभव नहीं है और मरीज की जान खतरे में है। तनाव में आए परिजन जब सहमत होते हैं, तो कुछ ही मिनटों में एंबुलेंस मौके पर पहुंच जाती है और मरीज को निजी अस्पताल भेज दिया जाता है।
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बताया जा रहा है कि मरीज माफिया का नेटवर्क मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक फैला है। यह नेटवर्क कमीशन के बलबूते चलता है। पुलिस ने इस पर सख्ती दिखाते हुए पिछले 13 दिन में पांच निजी एंबुलेंस सीज की हैं। हाल ही में ट्रामा सेंटर और मेडिकल कॉलेज परिसर से कई एंबुलेंस पकड़ी गईं। एक मामले में चालक पुलिस को देखकर वाहन छोड़कर भाग गया था।
सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दुकानों पर होती है प्लानिंग
बीआरडी मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया के बिचौलिए रात में ही सक्रिय होते हैं। दिन में वह बाहर की दुकानों पर बैठकर प्लानिंग करते हैं। शाम होते ही वह अलग-अलग जगहों पर घूमते रहते हैं। दूसरे जिलों और बिहार से रेफर होकर आने वाले मरीजों को ही वह टारगेट करते हैं क्योंकि उनको शहर के बारे में जानकारी नहीं होती।