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Gorakhpur News: देर तक कुर्सी पर बैठना पड़ सकता है भारी...हो जाएगी दिल और शुगर की बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 13 Apr 2026 02:27 AM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में 80 प्रतिशत तक जोखिम की हुई पुष्टि
30-40 वर्ष के युवाओं में फैटी लिवर और प्री-डायबिटीज के केस बढ़े
लगातार बैठने से मांसपेशियां निष्क्रिय, शरीर में तेजी से बढ़ता है फैट
गोरखपुर। एक जगह लगातार पांच से छह घंटे बैठकर काम करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मांसपेशियां निष्क्रिय होनी शुरू हो जाती हैं और शरीर में फैट जमा होने लगता है। हृदयघात और शुगर जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले दो सालों में मेडिसिन विभाग में किए गए एक अध्ययन में ये बात सामने आई हैं। मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि इतनी देर तक बैठना एक दिन में 10 से 15 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचाता है। ऐसे लोगों में 80 प्रतिशत तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकसित होने की आशंका रहती है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो फैटी लिवर और प्री-डायबिटीज जैसी समस्याओं से पिछले दो सालों में ग्रसित हुए हैं। इसका मुख्य कारण शारीरिक श्रम में कमी और लगातार बैठकर काम करने की आदत है।
डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि पहले इस तरह की बीमारियां वृद्धावस्था में देखने को मिलती थीं लेकिन अब युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। घंटों बैठना एक धीमी मौत की तरह है, जिसका असर धीरे-धीरे सामने आता है। हर 30 मिनट के बाद कम से कम दो मिनट टहलें ताकि शरीर सक्रिय बना रहे और गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके।
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लगातार बैठने से मांसपेशियां निष्क्रिय, शरीर में तेजी से बढ़ता है फैट
गोरखपुर। एक जगह लगातार पांच से छह घंटे बैठकर काम करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। मांसपेशियां निष्क्रिय होनी शुरू हो जाती हैं और शरीर में फैट जमा होने लगता है। हृदयघात और शुगर जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले दो सालों में मेडिसिन विभाग में किए गए एक अध्ययन में ये बात सामने आई हैं। मेडिसिन विभाग के डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि इतनी देर तक बैठना एक दिन में 10 से 15 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान पहुंचाता है। ऐसे लोगों में 80 प्रतिशत तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकसित होने की आशंका रहती है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है, जो फैटी लिवर और प्री-डायबिटीज जैसी समस्याओं से पिछले दो सालों में ग्रसित हुए हैं। इसका मुख्य कारण शारीरिक श्रम में कमी और लगातार बैठकर काम करने की आदत है।
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डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि पहले इस तरह की बीमारियां वृद्धावस्था में देखने को मिलती थीं लेकिन अब युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। घंटों बैठना एक धीमी मौत की तरह है, जिसका असर धीरे-धीरे सामने आता है। हर 30 मिनट के बाद कम से कम दो मिनट टहलें ताकि शरीर सक्रिय बना रहे और गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके।