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Gorakhpur News: गोरखपुर की दिव्या ने साइकिल से फतह किया माउंट एवरेस्ट का बेस कैंप
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माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर दिव्या सिंह।
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गोरखपुर। पुरानी कहावत है, जहां चाह वहीं राह। इसे फिर से स्थापित किया है जनपद के पिपरौली विकास खंड क्षेत्र के बनौड़ा गांव की दिव्या सिंह ने। दिव्या ने साइकिल से माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर पहुंचकर तिरंगा लहराया है। उनका दावा है कि ऐसा करने वाली वह भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला हैं।
दिव्या सिंह ने साइकिल यात्रा की शुरुआत 16 मार्च को काठमांडू से की थी। सलेरी, सुरखे, फॉकडिंग, सागरमाथा नेशनल पार्क, नामचे बाजार, डीबोचे, फिरचे, लोबुचे, गोरखशेप होते हुए यात्रा पूरी की। 24 मार्च को उन्होंने 17,560 फुट ऊंचे माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर तिरंगा फहराया।
बकौल दिव्या, उस समय एवरेस्ट बेस कैंप पर तापमान माइनर 12 डिग्री था। वापसी यात्रा में रविवार की रात साइकिल से काठमांडू पहुंचीं। इस साइकिल यात्रा में कुल 14 दिन लगे।
चिली की जयसिंटा पहली महिला साइकिलिस्ट
इससे पहले बीते 11 फरवरी को चिली की जयसिंटा कोरेया साइकिल से एवरेस्ट के बेस कैंप पर पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनी थीं। इस तरह दिव्या यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की दूसरी और भारत की पहली महिला बन गई हैं।
डेढ़ साल तक किया निरंतर अभ्यास
दिव्या के पिता संतराज सिंह निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं और माता उर्मिला सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। परिवार से सहयोग मिला तो डेढ़ साल पहले उन्होंने माउंट एवरेस्ट की ट्रैकिंग की थी। इसके बाद प्रशिक्षण शुरू किया। इस दौरान वह निरंतर अभ्यास करती रहीं।
मुश्किलों से भरी थी एवरेस्ट की राह
28 वर्षीय दिव्या ने बताया कि इस यात्रा में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मौसम बहुत ही ज्यादा खराब था। हर दिन स्नोफॉल और बारिश होती रही। दिन में भी तापमान माइनस में चला जाता था। रास्ता ऐसा था कि हर दिन आधे से ज्यादा समय साइकिल को कंधे पर उठाकर चलना पड़ा। ग्लेशियर के बीच, वातावरण में कम ऑक्सीजन, ऊंचाई, ठंड, थकान और दर्द सब एक साथ थे। इसके बाद भी हर दिन लगभग 10 से 12 घंटे साइक्लिंग करनी पड़ती थी। उनके कोच और पर्वतारोही उमा सिंह इस यात्रा के दौरान गाइड रहे।
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दिव्या सिंह ने साइकिल यात्रा की शुरुआत 16 मार्च को काठमांडू से की थी। सलेरी, सुरखे, फॉकडिंग, सागरमाथा नेशनल पार्क, नामचे बाजार, डीबोचे, फिरचे, लोबुचे, गोरखशेप होते हुए यात्रा पूरी की। 24 मार्च को उन्होंने 17,560 फुट ऊंचे माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप पर तिरंगा फहराया।
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बकौल दिव्या, उस समय एवरेस्ट बेस कैंप पर तापमान माइनर 12 डिग्री था। वापसी यात्रा में रविवार की रात साइकिल से काठमांडू पहुंचीं। इस साइकिल यात्रा में कुल 14 दिन लगे।
चिली की जयसिंटा पहली महिला साइकिलिस्ट
इससे पहले बीते 11 फरवरी को चिली की जयसिंटा कोरेया साइकिल से एवरेस्ट के बेस कैंप पर पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनी थीं। इस तरह दिव्या यह उपलब्धि हासिल करने वाली दुनिया की दूसरी और भारत की पहली महिला बन गई हैं।
डेढ़ साल तक किया निरंतर अभ्यास
दिव्या के पिता संतराज सिंह निजी क्षेत्र में नौकरी करते हैं और माता उर्मिला सिंह बेसिक शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं। परिवार से सहयोग मिला तो डेढ़ साल पहले उन्होंने माउंट एवरेस्ट की ट्रैकिंग की थी। इसके बाद प्रशिक्षण शुरू किया। इस दौरान वह निरंतर अभ्यास करती रहीं।
मुश्किलों से भरी थी एवरेस्ट की राह
28 वर्षीय दिव्या ने बताया कि इस यात्रा में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मौसम बहुत ही ज्यादा खराब था। हर दिन स्नोफॉल और बारिश होती रही। दिन में भी तापमान माइनस में चला जाता था। रास्ता ऐसा था कि हर दिन आधे से ज्यादा समय साइकिल को कंधे पर उठाकर चलना पड़ा। ग्लेशियर के बीच, वातावरण में कम ऑक्सीजन, ऊंचाई, ठंड, थकान और दर्द सब एक साथ थे। इसके बाद भी हर दिन लगभग 10 से 12 घंटे साइक्लिंग करनी पड़ती थी। उनके कोच और पर्वतारोही उमा सिंह इस यात्रा के दौरान गाइड रहे।