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Gorakhpur News: अभिभावक के जाने पर बंधक बेटे को छोड़ेगा नशा मुक्ति केंद्र
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गोरखपुर। पिता की मौत के बाद भी बेटे को अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया गया। मामले में नशा मुक्ति केंद्र प्रबंधन ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि यदि कोई वैध अभिभावक युवक को लेने आता तो उसे तत्काल सुपुर्द कर दिया जाता। अब पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।
चिलुआताल थाना क्षेत्र में आने वाले नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक पिछले करीब 20 महीनों से भर्ती है। आरोप है कि उसके पिता की 26 जून को मृत्यु हो गई लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद युवक को अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं कराया जा सका। इस घटना ने मानवता और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि नशे की लत छुड़ाने के लिए पिता ने ही बेटे को 20 महीने पहले केंद्र में भर्ती कराया था लेकिन अब पिता इस दुनिया में नहीं हैं और बेटा अभी भी केंद्र की चारदीवारी में है। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि युवक पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। मामले की जानकारी मिलने पर चिलुआताल पुलिस ने केंद्र प्रबंधन से बातचीत की।
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थाना प्रभारी सूरज सिंह ने बताया कि संस्था के एचआर रजा खान ने कहा है कि युवक को छोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है, केवल किसी जिम्मेदार अभिभावक के आने की प्रतीक्षा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी तरह की आर्थिक शर्त नहीं रखी गई है। हालांकि एचआर ने यह भी बताया कि बीते 20 महीनों में युवक के परिजनों से बातचीत चल रही थी और पिता ने कहा था कि संपत्ति बिकने के बाद बकाया भुगतान किया जाएगा। दावा है कि इस दौरान संस्थान को कोई भुगतान नहीं मिला, बावजूद इसके युवक की देखभाल की गई।
इधर, पुलिस का कहना है कि यदि जांच में यह पाया गया कि अभिभावक की मौजूदगी के बावजूद युवक को जबरन रोका गया तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले ने अब मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
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चिलुआताल थाना क्षेत्र में आने वाले नशा मुक्ति केंद्र में एक युवक पिछले करीब 20 महीनों से भर्ती है। आरोप है कि उसके पिता की 26 जून को मृत्यु हो गई लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद युवक को अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल नहीं कराया जा सका। इस घटना ने मानवता और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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बताया जा रहा है कि नशे की लत छुड़ाने के लिए पिता ने ही बेटे को 20 महीने पहले केंद्र में भर्ती कराया था लेकिन अब पिता इस दुनिया में नहीं हैं और बेटा अभी भी केंद्र की चारदीवारी में है। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि युवक पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। मामले की जानकारी मिलने पर चिलुआताल पुलिस ने केंद्र प्रबंधन से बातचीत की।
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थाना प्रभारी सूरज सिंह ने बताया कि संस्था के एचआर रजा खान ने कहा है कि युवक को छोड़ने में कोई आपत्ति नहीं है, केवल किसी जिम्मेदार अभिभावक के आने की प्रतीक्षा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी तरह की आर्थिक शर्त नहीं रखी गई है। हालांकि एचआर ने यह भी बताया कि बीते 20 महीनों में युवक के परिजनों से बातचीत चल रही थी और पिता ने कहा था कि संपत्ति बिकने के बाद बकाया भुगतान किया जाएगा। दावा है कि इस दौरान संस्थान को कोई भुगतान नहीं मिला, बावजूद इसके युवक की देखभाल की गई।
इधर, पुलिस का कहना है कि यदि जांच में यह पाया गया कि अभिभावक की मौजूदगी के बावजूद युवक को जबरन रोका गया तो विधिक कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले ने अब मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं पर गंभीर बहस छेड़ दी है।