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चौरीचौरा डबल मर्डर: पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद भी उलझी गुत्थी, 4 के बयानों में अंतर- बेटी ने भी उलझाया

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 22 Apr 2026 02:17 AM IST
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सार

खुशबू की तहरीर पर पुलिस ने संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता सरजू (कोटेदार), भाई सुरेंद्र और दो अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने संजय को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उसे जमानत मिल गई। इसके बाद ही पुलिस ने मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का फैसला लिया गया था।

Even after the polygraph test, mystery remains complicated; daughter's statement also confused.
वादी मुकदमा खुशबू( सूट में) व मृतक मां की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चौरीचौरा थाना क्षेत्र में हुए चर्चित मां-बेटी हत्याकांड की गुत्थी सुलझने के बजाय और पेचीदा हो गई है। पुलिस की ओर से कराए गए पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट के नतीजों ने जांच को नई दिशा देने के बजाय कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छह लोगों के इस टेस्ट में सिर्फ दो लोगों के बयान स्पष्ट और संतोषजनक पाए गए, जबकि वादी मुकदमा खुशबू समेत चार लोगों के बयानों में विरोधाभास सामने आया है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छह लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट बंगलूरू में कराया। यह प्रक्रिया सीओ कैंपियरगंज के नेतृत्व में पूरी हुई। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान चार अहम सवाल पूछे गए थे। इनमें से सुरेंद्र और सरजू नाम के दो आरोपियों ने सभी सवालों पर स्पष्ट जवाब दिए, जबकि बाकी चार लोगों के जवाबों में असंगति और झिझक दिखाई दी।
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पुलिस की जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वादी मुकदमा खुशबू के बयान भी पूरी तरह सुसंगत नहीं पाए गए। पॉलीग्राफ टेस्ट के दौरान उसके जवाबों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह पूरी तरह सच बोल रही है या नहीं।

वहीं, मुख्य आरोपी संजय, जो पहले जेल जा चुका है, उसके बयान भी टेस्ट में पूरी तरह खरे नहीं उतरे। इससे पुलिस अब इस संभावना पर भी विचार कर रही है कि घटना में शामिल लोगों की भूमिका अपेक्षा से अधिक जटिल हो सकती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पॉलीग्राफ टेस्ट को अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता, बल्कि यह केवल जांच को दिशा देने का एक माध्यम होता है। ऐसे में अब पुलिस अन्य तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल्स, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर केस को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है।

फिलहाल इस डबल मर्डर केस में सच तक पहुंचने के लिए पुलिस तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भरोसा कर रही है। हालांकि, पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद बढ़ी उलझनों ने यह साफ कर दिया है कि इस मामले का पर्दाफाश आसान नहीं होने वाला।

29 मार्च की रात हुई थी निर्मम हत्या
यह सनसनीखेज वारदात 29-30 मार्च 2025 की रात चौरीचौरा थाना क्षेत्र के शिवपुर चकदहा गांव में हुई थी। रात करीब 1:30 बजे हमलावरों ने घर में सो रही पूनम (45) और उसकी बेटी अनुष्का (13) की गड़ासे से हत्या कर दी थी। घटना के बाद पूनम का मोबाइल घर के बाहर खेत में मिला था। वहीं, बड़ी बेटी खुशबू घटना के समय दूसरे कमरे में बंद मिली थी, जिसे पुलिस ने दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला।

एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद भी अधूरा सच
खुशबू की तहरीर पर पुलिस ने संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता सरजू (कोटेदार), भाई सुरेंद्र और दो अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने संजय को गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उसे जमानत मिल गई। इसके बाद ही पुलिस ने मामले की सच्चाई तक पहुंचने के लिए पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का फैसला लिया।

पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट आ गई है। उसका अध्ययन कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। टेस्ट के हिसाब से सिर्फ दो लोग का सभी सवालों का जवाब साफ है जबकि चार के स्पष्ट नहीं हैं: ज्ञानेंद्र कुमार, एसपी नार्थ
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