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गोरखपुर: चीनी उत्पादन बढ़ाने के लिए शोध करेंगे विशेषज्ञ, मिलों को होता है आर्थिक नुकसान

Sat, 19 Feb 2022 11:16 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 19 Feb 2022 11:16 AM IST
सार

मिल प्रबंधन ने एमएमएमयूटी विश्वविद्यालय से मांगा सहयोग, कम चीनी उत्पादन के चलते मिलों को होता है आर्थिक नुकसान।

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Experts will do research to increase sugar production
पिपराइच चीनी मिल। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

चीनी परता (प्रति क्विंटल गन्ने से चीनी उत्पादन की मात्रा) बढ़ाने के उपायों पर शोध के लिए पिपराइच मिल ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मदद ली है। एमएमएमयूटी के शिक्षकों व छात्रों का एक समूह मिल की तकनीकी के अलावा गन्ने की प्रजातियों का भी परीक्षण करेगा।

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तीन साल पहले ही लगी पिपराइच चीनी मिल का चीनी परता 10 से कम रह रहा है। इससे मिल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान भी देरी से हो रहा है।
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पिछले महीने मिल का निरीक्षण करने गए डीएम ने मिल प्रबंधन से इस पर चर्चा की थी। इसके बाद मिल प्रबंधन ने चीनी परता बढ़ाने के उपायों पर शोध के लिए एमएमएमयूटी से संपर्क किया था। विश्वविद्यालय ने भी इस पर शिक्षकों के अलावा छात्रों के एक समूह को रिसर्च के लिए चिह्नित किया है। शिक्षकों व छात्रों का समूह एक बार मिल का भ्रमण भी कर चुका है। रिसर्च टीम मिल की तकनीकी के अलावा गन्ने की प्रजातियों, बुवाई की विधि आदि का भी परीक्षण करेगी।

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प्राइवेट मिलों का चीनी परता 11 प्रतिशत से अधिक

गोरखपुर मंडल में नौ चीनी मिलें हैं, जिनमें सर्वाधिक पांच मिलें कुशीनगर जिले में हैं। इसके अलावा महराजगंज में दो तथा गोरखपुर व देवरिया में एक-एक मिल है। कुशीनगर की हाटा, कप्तानगंज, रामकोला व सेवरही मिलों का परता 11 प्रतिशत से अधिक है। वहीं गोरखपुर की पिपराइच में नई मिल लगने के बावजूद परता 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ़ पा रहा है। इसका असर मिल की आर्थिक क्षमता पर पड़ रहा है।

कम परता के चलते बंद हुई थीं मिलें

उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन रहीं कुशीनगर की छितौनी, लक्ष्मीगंज, रामकोला खेतान समेत अधिकांश मिलें कम परता के चलते ही बंद हुई थीं। पिपराइच की पुरानी मिल भी केवल कम परता के चलते ही घाटे में चली गई थी। इसलिए नई चीनी मिल को घाटे से बचाने के लिए बिजली उत्पादन के साथ-साथ एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया गया था।

बोले जीएम

पिपराइच चीनी मिल के महाप्रबंधक जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि मिल की चीनी परता को बढ़ाने के लिए एमएमएमयूटी की एक टीम रिसर्च कर रही है। इस साल भी मिल का परता 10 से नीचे रहा है। चीनी उत्पादन कम होने से मिल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। रिसर्च टीम ने मिल की तकनीकी समेत कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रिपोर्ट बनाने की बात कही है।

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