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पटाखों की आवाज और धुएं से गर्भवतियों को ज्यादा खतरा, विशेषज्ञों ने बताईं ये बड़ी बातें
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 11:05 AM IST
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gorakhpur news
- फोटो : अमर उजाला।
पटाखे केवल पर्यावरण को ही प्रदूषित नहीं करते, बल्कि उनकी वजह से कई तरह की बीमारियां भी होती हैं। डॉक्टर बताते हैं कि गर्भवतियों के लिए पटाखे ज्यादा नुकसानदायक होते हैं। उनके गर्भ में पल रहे शिशु पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है।
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डॉ. वानी आदित्य।
- फोटो : अमर उजाला।
पटाखों में मौजूद लेड सेहत के लिए खतरनाक
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वानी आदित्य ने बताया कि पटाखों में मौजूद लेड सेहत के लिए खतरनाक हैं। इस कारण स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वानी आदित्य ने बताया कि पटाखों में मौजूद लेड सेहत के लिए खतरनाक हैं। इस कारण स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के साथ शरीर में जाता है तो खून के प्रवाह में रुकावट आने लगती है। इससे गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचता है।
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डॉ. बबिता शुक्ला।
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चों को हो सकती है सांस की समस्या
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि बच्चे और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। पटाखों से निकला गाढ़ा धुआं खासतौर पर छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा करता है। धुएं के कारण गर्भवती मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचाता है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि बच्चे और गर्भवती महिलाओं को पटाखों के शोर व धुएं से बचकर रहना चाहिए। पटाखों से निकला गाढ़ा धुआं खासतौर पर छोटे बच्चों में सांस की समस्याएं पैदा करता है। धुएं के कारण गर्भवती मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचाता है।
डॉ. मीनाक्षी गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला।
बढ़ जाती है गर्भपात की संभावना
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी गुप्ता ने बताया कि पटाखों में हानिकारक रसायन होते हैं, इससे निकलने वाला धुआं सांस के माध्यम से अंदर जाकर कई समस्याएं उत्पन्न करता है। बच्चों के विकास में रुकावट पैदा हो सकती है। पटाखों के धुएं से गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ऐसे समय में घर पर ही रहना चाहिए।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनाक्षी गुप्ता ने बताया कि पटाखों में हानिकारक रसायन होते हैं, इससे निकलने वाला धुआं सांस के माध्यम से अंदर जाकर कई समस्याएं उत्पन्न करता है। बच्चों के विकास में रुकावट पैदा हो सकती है। पटाखों के धुएं से गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ऐसे समय में घर पर ही रहना चाहिए।
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डॉ. स्मिता मोदी।
- फोटो : अमर उजाला।
बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता मोदी ने बताया कि गर्भवतियों को शुरू के तीन महीनों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में जब पटाखे का धुआं निकलता है, तो मां के सांस लेने पर बच्चों तक धुआं पहुंचेगा। इससे बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है। अगर मां डर गई तो बच्चा भी डर जाता है। इससे खतरा ज्यादा रहता है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता मोदी ने बताया कि गर्भवतियों को शुरू के तीन महीनों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में जब पटाखे का धुआं निकलता है, तो मां के सांस लेने पर बच्चों तक धुआं पहुंचेगा। इससे बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है। अगर मां डर गई तो बच्चा भी डर जाता है। इससे खतरा ज्यादा रहता है।