{"_id":"69c6f232388e467a5204371a","slug":"global-ai-confluence-jointly-organized-by-vosy-meta-and-ddu-begins-gorakhpur-news-c-7-gkp1006-1271366-2026-03-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: ‘ज्ञान मंथन’ से विश्व कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: ‘ज्ञान मंथन’ से विश्व कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे
विज्ञापन
गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह व अन्य।
विज्ञापन
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि ‘ग्लोबल एआई कॉन्फ्लुएंस-2026’ केवल एक तकनीकी आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारों के मंथन का एक सशक्त मंच है। यहां 26 देशों से आए 180 प्रतिभागी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार कर रहे हैं। ज्ञान मंथन’ से विश्व कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे।
वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रकल्प वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टूडेंट एंड यूथ (वोसी), मेटा एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्लुएंस’ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
डीडीयू के गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सतयुग में समुद्र मंथन से मानवता के लिए अमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार इस आधुनिक ‘ज्ञान मंथन’ से भी विश्व के कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे। भारत की संस्कृति सदैव विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित रही है।
उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए हम अपनी विरासत और मूल्यों को साथ लेकर चलें। उन्होंने आह्वान किया कि एआई के क्षेत्र में कार्य करते हुए मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
विशिष्ट अतिथि आईआईटी, भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि मानव बुद्धिमत्ता को सदैव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ऊपर रखना आवश्यक है, क्योंकि एआई हमारा सहायक है, स्वामी नहीं। एआई हमें विशाल डाटा का विश्लेषण कर दिशा दिखा सकता है लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी मानव की ही होनी चाहिए। तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवता के हित में कार्य करे और जीवन को सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बनाए।
विशिष्ट अतिथि एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि एआई आज केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं बल्कि ज्ञान, विचार और समाज की दिशा निर्धारित करने वाली एक निर्णायक शक्ति बनती जा रही है। एआई के क्षेत्र में नवाचार करते समय भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम की भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व व वैश्विक कल्याण को सर्वोपरि रखें।
अध्यक्षता डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। वोसी के चेयरपर्सन डॉ. नितिन शर्मा ने स्वागत व महासचिव शुभम गोयल ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री बालकृष्ण, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. सुषमा पांडेय, निखिता रेड्डी, यशोराज पांडेय, लीला, एबीवीपी गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
Trending Videos
वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रकल्प वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर स्टूडेंट एंड यूथ (वोसी), मेटा एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉन्फ्लुएंस’ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
डीडीयू के गुरु श्री गोरक्षनाथ शोधपीठ में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सतयुग में समुद्र मंथन से मानवता के लिए अमूल्य रत्न प्राप्त हुए थे, उसी प्रकार इस आधुनिक ‘ज्ञान मंथन’ से भी विश्व के कल्याण के लिए नई तकनीकें, नवाचार और समाधान निकलेंगे। भारत की संस्कृति सदैव विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित रही है।
उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में आगे बढ़ते हुए हम अपनी विरासत और मूल्यों को साथ लेकर चलें। उन्होंने आह्वान किया कि एआई के क्षेत्र में कार्य करते हुए मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
विशिष्ट अतिथि आईआईटी, भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने कहा कि मानव बुद्धिमत्ता को सदैव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ऊपर रखना आवश्यक है, क्योंकि एआई हमारा सहायक है, स्वामी नहीं। एआई हमें विशाल डाटा का विश्लेषण कर दिशा दिखा सकता है लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी मानव की ही होनी चाहिए। तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवता के हित में कार्य करे और जीवन को सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बनाए।
विशिष्ट अतिथि एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने कहा कि एआई आज केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं बल्कि ज्ञान, विचार और समाज की दिशा निर्धारित करने वाली एक निर्णायक शक्ति बनती जा रही है। एआई के क्षेत्र में नवाचार करते समय भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुंबकम की भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व व वैश्विक कल्याण को सर्वोपरि रखें।
अध्यक्षता डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। वोसी के चेयरपर्सन डॉ. नितिन शर्मा ने स्वागत व महासचिव शुभम गोयल ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर अभाविप के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री बालकृष्ण, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. सुषमा पांडेय, निखिता रेड्डी, यशोराज पांडेय, लीला, एबीवीपी गोरक्ष प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राकेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।