{"_id":"69556abaa9ed7b71b90b0d21","slug":"hindi-is-a-powerful-medium-for-communicating-with-ordinary-citizens-gorakhpur-news-c-7-gkp1062-1182800-2025-12-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: हिंदी आम नागरिकों से संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: हिंदी आम नागरिकों से संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम
विज्ञापन
विज्ञापन
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में बोले सांसद रवि किशन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सांसद रवि किशन शुक्ल बुधवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने हिंदी के अधिक प्रभावी, सरल और व्यापक प्रयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं बल्कि आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने जोर दिया कि पृथ्वी विज्ञान जैसे तकनीकी और वैज्ञानिक विषयों को भी सरल, सहज और जनसामान्य की समझ में आने वाली हिंदी में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। सांसद ने सुझाव दिया कि मंत्रालय की रिपोर्ट, शोध पत्र, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रेस विज्ञप्तियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री हिंदी में अधिक से अधिक प्रकाशित की जाएं। इससे न केवल राजभाषा हिंदी को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम नागरिकों की वैज्ञानिक विषयों में रुचि और समझ भी बढ़ेगी।
Trending Videos
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सांसद रवि किशन शुक्ल बुधवार को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने हिंदी के अधिक प्रभावी, सरल और व्यापक प्रयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल कार्यालयी भाषा नहीं बल्कि आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने जोर दिया कि पृथ्वी विज्ञान जैसे तकनीकी और वैज्ञानिक विषयों को भी सरल, सहज और जनसामान्य की समझ में आने वाली हिंदी में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। सांसद ने सुझाव दिया कि मंत्रालय की रिपोर्ट, शोध पत्र, वैज्ञानिक अध्ययन, प्रेस विज्ञप्तियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री हिंदी में अधिक से अधिक प्रकाशित की जाएं। इससे न केवल राजभाषा हिंदी को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम नागरिकों की वैज्ञानिक विषयों में रुचि और समझ भी बढ़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
