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Exclusive: कोरोना के इन खास मरीजों को देनी चाहिए प्लाज्मा थेरेपी, आईसीएमआर ने जारी की नई गाइडलाइन
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 21 Nov 2020 04:35 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : PTI
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कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी पर उठे सवालों के बीच आईसीएमआर ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत प्लाज्मा थेरेपी उन्हीं मरीजों को देनी चाहिए जिनके शरीर में कोरोना से लड़ने वाली एंटीबॉडी कभी न बनी हों। लक्षण शुरू होने के पांच से 10 दिन के अंदर प्लाज्मा थेरेपी दे देनी चाहिए। 10 दिन बाद इसका कोई लाभ नहीं है। बीआरडी ने इन निर्देशों पर अमल करना शुरू कर दिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : Amar Ujala
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से हरी झंडी मिलने के बाद देश भर में प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत की गई थी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब तक 20 मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा चुकी है।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
परिणाम बेहतर मिलने पर कॉलेज प्रशासन ने यह फैसला लिया है कि गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी के जरिए ठीक किया जाएगा। हाल के दिनों में प्लाज्मा दान करने के लिए कोरोना से जंग जीत चुके कई मरीज आगे आए हैं। अब तक 15 यूनिट प्लाज्मा बीआरडी को मिल भी चुका है। 50 से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन भी कराया है।
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- फोटो : Pixabay
प्लाज्मा थेरेपी जल्द शुरू करने पर मिलेंगे बेहतर परिणाम
आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर डॉ. रजनीकांत ने बताया कि कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा 28 दिन के अंदर ही लेना चाहिए। अधिकतम पांच से 10 दिनों के अंदर उसे संक्रमित मरीजों को चढ़ा देना चाहिए। तभी इसके परिणाम बेहतर मिलेंगे। रिसर्च में सामने आया है कि कुछ मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 90 के नीचे चला गया था। उन्हें तत्काल 10 से 12 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत थी। लेकिन प्लाज्मा थेरेपी शुरू होने के बाद ऑक्सीजन लेवल वापस 90 पर आ गया और ऑक्सीजन की जरूरत भी केवल 2 लीटर रह गई।
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- फोटो : iStock
आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर डॉ. रजनीकांत ने बताया कि गंभीर मरीजों को 10 दिनों के अंदर ही प्लाज्मा थेरेपी देनी चाहिए। इसके बाद प्लाज्मा थेरेपी का खास फायदा नहीं है। अब तक रिसर्च में यह बातें सामने आई है।
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