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मिलावट का खेल: नेपाल से 80 रुपये में ला रहे पाम ऑयल...सरसों का मिलावटी तेल बेच रहे 160 रुपये लीटर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:00 PM IST
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सार
शुद्ध और मिलावटी मिलाकर सरसों तेल की मंडल में प्रतिदिन 15 टन की खपत है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के हार्बर्ट बंधे के पास के इलाकों में आज भी कुछ ऐसे धंधेबाज हैं जो सरसों का मिलावटी तेल बनाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हें पुलिस का भी कोई डर नहीं है। इनमें से कुछ की तो सेटिंग है, जिनकी नहीं है, वे कार्रवाई की जद में आते हैं।
हावर्ट बंधे के पास तेल का डब्बा खाली करते लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
होली को देखते हुए सरसों तेल में मिलावट करने वाले धंधेबाज जिले व आसपास सक्रिय हो गए हैं। धंधेबाज नेपाल से पाम ऑयल 80 रुपये में ला रहे हैं और उसमें केमिकल और एसेंस मिलाकर सरसों का मिलावटी तेल तैयार कर उसे 150 से 160 रुपये में बेच रहे हैं। पीले रंग व सरसों के तेल का सुगंध देने वाले केमिकल के इस्तेमाल से मिलावटी तेल एकदम असली जैसा नजर आता है। धंधेबाज रोजाना मंडल में पांच टन मिलावटी तेल खपा रहे हैं।
शुद्ध और मिलावटी मिलाकर सरसों तेल की मंडल में प्रतिदिन 15 टन की खपत है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के हार्बर्ट बंधे के पास के इलाकों में आज भी कुछ ऐसे धंधेबाज हैं जो सरसों का मिलावटी तेल बनाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हें पुलिस का भी कोई डर नहीं है। इनमें से कुछ की तो सेटिंग है, जिनकी नहीं है, वे कार्रवाई की जद में आते हैं।
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शुद्ध और मिलावटी मिलाकर सरसों तेल की मंडल में प्रतिदिन 15 टन की खपत है। सूत्रों के मुताबिक, शहर के हार्बर्ट बंधे के पास के इलाकों में आज भी कुछ ऐसे धंधेबाज हैं जो सरसों का मिलावटी तेल बनाकर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन्हें पुलिस का भी कोई डर नहीं है। इनमें से कुछ की तो सेटिंग है, जिनकी नहीं है, वे कार्रवाई की जद में आते हैं।
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सूत्रों ने बताया कि यह धंधा जिले के साथ-साथ देवरिया में भी चलता है। नेपाल से धंधेबाज बिना टैक्स दिए सस्ता पाम ऑयल सौनौली लाते हैं। फिर महाराजगंज के रास्ते इसे जिले में लाया जाता है। कुछ माल यहां से देवरिया चला जाता है तो कुछ हार्बर्ट बंधे के पास धंधेबाजों को देते हैं। यह खेल काफी वर्षों से चला आ रहा है, जो त्योहारों में तेज हो जाता है।
यहां तेल के पुराने टिन के डिब्बे खरीदकर इसे साफ करने का कार्य भी होता है जिसे सस्ते दामों पर धंधेबाज खरीद लेते हैं। इसके बाद मिलावट वाले तेल इसमें भरे जाते हैं। तैयार होने के बाद इसे महाराजगंज, बस्ती, बलिया व अन्य जगह के भी ग्रामीण क्षेत्रों में भेजते हैं।
यहां तेल के पुराने टिन के डिब्बे खरीदकर इसे साफ करने का कार्य भी होता है जिसे सस्ते दामों पर धंधेबाज खरीद लेते हैं। इसके बाद मिलावट वाले तेल इसमें भरे जाते हैं। तैयार होने के बाद इसे महाराजगंज, बस्ती, बलिया व अन्य जगह के भी ग्रामीण क्षेत्रों में भेजते हैं।
सूत्रों ने बताया कि नेपाल में सस्ता पाम ऑयल 80 रुपये लीटर के आसपास मिलता है। तेल बनाने में रंग व केमिकल सहित अन्य खर्च मिलाकर कुल लागत 120 रुपये लीटर पड़ता है, जिसे यह 140 रुपये में फुटकर दुकानदार को बेचते हैं। फिर दुकानदार इसे 150 से 160 रुपये में बेच देते हैं।
शुद्ध तेल के कारोबारी महेश अग्रवाल बताते हैं कि सरसों इस समय 60 से लेकर 90 रुपये तक किलो बिक रहा है। एक किलो सरसों में 380 ग्राम तेल निकलता है। खरी छोड़ने पर पेराई नहीं ली जाती है जिससे एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल लगभग 210 रुपये लीटर या इसके आसपास पड़ता है। व्यापारी पवन सिंहानियां ने बताया कि सरसों के खराब तेल की बिक्री शहर में नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा होती है।
शुद्ध तेल के कारोबारी महेश अग्रवाल बताते हैं कि सरसों इस समय 60 से लेकर 90 रुपये तक किलो बिक रहा है। एक किलो सरसों में 380 ग्राम तेल निकलता है। खरी छोड़ने पर पेराई नहीं ली जाती है जिससे एक लीटर शुद्ध सरसों का तेल लगभग 210 रुपये लीटर या इसके आसपास पड़ता है। व्यापारी पवन सिंहानियां ने बताया कि सरसों के खराब तेल की बिक्री शहर में नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा होती है।
खराब तेल खाने से खराब होता है लिवर
जिला अस्पताल के डॉक्टर बीके सुमन ने बताया कि खराब व मिलावटी तेल खाने से पेट की बीमारियां होती हैं। साथ ही लोगों का लिवर भी खराब होता है। बीमारी तत्काल नहीं बल्कि बाद में पता चलती है जिसका इलाज महंगा व काफी लंबा चलने वाला होता है।
मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाते हैं जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। अगर मिलावटी तेल कहीं पर बन रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
जिला अस्पताल के डॉक्टर बीके सुमन ने बताया कि खराब व मिलावटी तेल खाने से पेट की बीमारियां होती हैं। साथ ही लोगों का लिवर भी खराब होता है। बीमारी तत्काल नहीं बल्कि बाद में पता चलती है जिसका इलाज महंगा व काफी लंबा चलने वाला होता है।
मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे जाते हैं जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। अगर मिलावटी तेल कहीं पर बन रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी: डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
