{"_id":"69b166897486680f5307b76d","slug":"purvanchal-s-first-veterinary-college-will-be-ready-in-gorakhpur-construction-will-be-completed-by-june-2026-2026-03-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पूर्वांचल का पहला वेटरिनरी कॉलेज: जून तक बनकर हो जाएगा तैयार, पढाई के साथ पशुओं का इलाज भी होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्वांचल का पहला वेटरिनरी कॉलेज: जून तक बनकर हो जाएगा तैयार, पढाई के साथ पशुओं का इलाज भी होगा
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Wed, 11 Mar 2026 06:26 PM IST
विज्ञापन
सार
गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग के ताल नदोर में बन रहे वेटरिनरी कॉलेज का शिलान्यास एवं भूमि पूजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 मार्च 2024 को किया था। निर्माण कार्य 10 सितंबर 2024 को प्रारंभ हुआ था। यह वेटरिनरी कॉलेज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा से संबद्ध होगा।
पशु चिकित्सालय( संभावित)
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
विस्तार
पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला वेटरिनरी कॉलेज (पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय) के जून 2026 के अंत तक बनकर तैयार हो जाने की उम्मीद है। बन जाने के बाद यहां पशु चिकित्सा विज्ञान में डिग्री-डिप्लोमा की पढ़ाई के साथ पशुओं का इलाज भी होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस वेटरिनरी कॉलेज को भविष्य में यूनिवर्सिटी के रूप में अपग्रेड करने की मंशा जता चुके हैं।
Trending Videos
गोरखपुर-वाराणसी राजमार्ग के ताल नदोर में बन रहे वेटरिनरी कॉलेज का शिलान्यास एवं भूमि पूजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 मार्च 2024 को किया था। निर्माण कार्य 10 सितंबर 2024 को प्रारंभ हुआ था। यह वेटरिनरी कॉलेज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा से संबद्ध होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसके बन जाने से पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के पशुपालकों को काफी फायदा होगा। इस महाविद्यालय को 80 एकड़ क्षेत्रफल में क्रमवार तीन चरणों में विकसित किया जाएगा। इसके पहले चरण के निर्माण पर 277 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड (भवन) के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार के अनुसार वेटरिनरी कॉलेज के निर्माण की परियोजना में पहले चरण का 65 प्रतिशत कार्य हो चुका है। भवनों के स्ट्रक्चर का काम हो गया है। जून माह के अंत तक निर्माण कार्य को पूर्ण करा लिया जाएगा।
कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड (भवन) के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार के अनुसार वेटरिनरी कॉलेज के निर्माण की परियोजना में पहले चरण का 65 प्रतिशत कार्य हो चुका है। भवनों के स्ट्रक्चर का काम हो गया है। जून माह के अंत तक निर्माण कार्य को पूर्ण करा लिया जाएगा।
प्रथम चरण के अंतर्गत वेटरिनरी कॉलेज के परिसर में एकेडमिक ब्लॉक (भूतल+पांच मंजिल) हॉस्पिटल ब्लॉक, आवासीय ब्लॉक, 106 की क्षमता का पुरुष छात्रावास, 106 की क्षमता का महिला छात्रावास, 60-60 की क्षमता का पीजी पुरुष व पीजी महिला छात्रावास, ऑडिटोरियम, गेस्ट हाउस, कम्युनिटी सेंटर, पशुओं के रखने के स्थान, फीड स्टोर, एसटीपी, किसान भवन के साथ पशु चिकित्सा विज्ञान से जुड़ी विभिन्न विधाओं के शोध अध्ययन केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
इस महाविद्यालय परिसर को 'नेट जीरो एनर्जी' की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में यहां स्नातक स्तर पर 100 छात्रों के प्रवेश की व्यवस्था होगी।
इस महाविद्यालय परिसर को 'नेट जीरो एनर्जी' की अवधारणा पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। प्रारंभिक चरण में यहां स्नातक स्तर पर 100 छात्रों के प्रवेश की व्यवस्था होगी।
वेटरिनरी कॉलेज के भूमि पूजन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि इस पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय को भविष्य में विश्वविद्यालय बना दिया जाएगा। इस महाविद्यालय में पशुओं के इलाज के साथ नस्ल सुधार के कार्य भी होंगे। यहां फिशरीज से जुड़े कार्यक्रम को भी आगे बढ़ाया जाएगा। यहां पढ़ाई कर युवा पशु चिकित्सक बन सकेंगे, उनके पास करियर बनाने का नया प्लेटफार्म होगा।
राजा शालिहोत्र की परिकल्पना पर डिजाइन की गई है महाविद्यालय की ड्राइंग
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय की ड्राइंग श्रावस्ती के राजा शालिहोत्र की परिकल्पना पर डिजाइन की गई है। राजा शालिहोत्र ने तीसरी सदी में शालिहोत्र संहिता रचकर पशुधन के क्षेत्र को समृद्ध किया। भारतीय परंपरा में उन्हें पशु चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है।
राजा शालिहोत्र की परिकल्पना पर डिजाइन की गई है महाविद्यालय की ड्राइंग
पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय की ड्राइंग श्रावस्ती के राजा शालिहोत्र की परिकल्पना पर डिजाइन की गई है। राजा शालिहोत्र ने तीसरी सदी में शालिहोत्र संहिता रचकर पशुधन के क्षेत्र को समृद्ध किया। भारतीय परंपरा में उन्हें पशु चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है।