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Gorakhpur News: स्वयं सहायता समूह की महिलाएं तैयार कर रहीं बांस की बनी राखी
Mon, 03 Aug 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:25 AM IST
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गोरखपुर। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इस बार बांस से बनी आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार कर रही हैं। हल्के वजन, खूबसूरत डिजाइन और सस्ती कीमत के कारण इन राखियों की मांग लगातार बढ़ रही है। स्थानीय बाजार के साथ-साथ दुकानदार भी बड़ी संख्या में इन राखियों के ऑर्डर दे रहे हैं, जिससे महिलाओं को बेहतर रोजगार का अवसर मिल रहा है।
''''बैंबू लेडी ऑफ इंडिया'''' के नाम से पहचान रखने वाली नीरा शर्मा के मार्गदर्शन में महिलाओं को पहले बांस से आभूषण और हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। अब इसी कौशल का उपयोग कर महिलाएं रक्षाबंधन के लिए रंग-बिरंगी और आकर्षक बांस की राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में पारंपरिक डिजाइनों के साथ आधुनिक शैली का भी समावेश किया गया है, जो ग्राहकों को खूब पसंद आ रहा है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) में तैयार की जा रही ये राखियां पूरी तरह हस्तनिर्मित हैं। इनमें प्राकृतिक बांस का उपयोग होने से ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
महिलाएं बताती हैं कि हर दिन बड़ी संख्या में राखियां तैयार की जा रही हैं और कई व्यापारियों ने पहले से ही थोक ऑर्डर बुक करा लिए हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बांस आधारित उत्पादों को आजीविका का मजबूत माध्यम बना लिया है। बांस की राखियों के जरिये न केवल पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिल रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय भी बढ़ रही है। इसके साथ ही सीएफसी में बांस के उत्पाद मेंफ्लावर स्टैंड, गुलदस्ता, नाइटलैंप, नाव, कप, कुर्सी-मेज समेत कई सजावटी व उपयोगी वस्तुओं को लोग पसंद कर रहे हैं।
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''''बैंबू लेडी ऑफ इंडिया'''' के नाम से पहचान रखने वाली नीरा शर्मा के मार्गदर्शन में महिलाओं को पहले बांस से आभूषण और हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था। अब इसी कौशल का उपयोग कर महिलाएं रक्षाबंधन के लिए रंग-बिरंगी और आकर्षक बांस की राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों में पारंपरिक डिजाइनों के साथ आधुनिक शैली का भी समावेश किया गया है, जो ग्राहकों को खूब पसंद आ रहा है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) में तैयार की जा रही ये राखियां पूरी तरह हस्तनिर्मित हैं। इनमें प्राकृतिक बांस का उपयोग होने से ये पर्यावरण के अनुकूल भी हैं। कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
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महिलाएं बताती हैं कि हर दिन बड़ी संख्या में राखियां तैयार की जा रही हैं और कई व्यापारियों ने पहले से ही थोक ऑर्डर बुक करा लिए हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बांस आधारित उत्पादों को आजीविका का मजबूत माध्यम बना लिया है। बांस की राखियों के जरिये न केवल पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिल रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आय भी बढ़ रही है। इसके साथ ही सीएफसी में बांस के उत्पाद मेंफ्लावर स्टैंड, गुलदस्ता, नाइटलैंप, नाव, कप, कुर्सी-मेज समेत कई सजावटी व उपयोगी वस्तुओं को लोग पसंद कर रहे हैं।
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