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Gorakhpur News: स्मार्ट डिस्प्ले व बायोमेडिकल सेंसर विकसित करेंगे एमएमएमयूटी के डॉ. अंकित
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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकित वर्मा ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से संचालित ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ (एएनआरएफ) ने 70 लाख रुपये की शोध अनुदान राशि प्रदान की है।
डॉ. अंकित ने पिछले वर्ष ‘डेवलपमेंट ऑफ ट्रांसपेरेंट एंड फ्लेक्सिबल सेमीकंडक्टर डिवाइसेज फॉर नेक्स्ट जेनरेशन इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषयक अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे एएनआरएफ ने स्वीकृत करते हुए यह अनुदान प्रदान किया है। यह शोध परियोजना भविष्य के उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास के लिए पारदर्शी एवं लचीले सेमीकंडक्टरों के निर्माण पर केंद्रित है।
इसका उद्देश्य हल्के, लचीले और पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक घटकों का विकास करना है, जिन्हें पहनने योग्य उपकरणों, स्मार्ट डिस्प्ले, स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों व फोल्डेबल गैजेट्स में प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सके। यह परियोजना तीन वर्ष में पूरी करनी है।
वर्तमान में प्रयुक्त पारंपरिक सेमीकंडक्टर अपेक्षाकृत कठोर होते हैं, जबकि यह शोध उनकी सीमाओं को दूर कर अधिक ऊर्जा कुशल, टिकाऊ एवं बहुउद्देशीय उपकरणों के विकास की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा। इस तकनीक के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, रक्षा एवं संचार क्षेत्रों में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे।
इससे उत्पादन लागत में कमी, उपकरणों की पोर्टेबिलिटी में वृद्धि व पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा भी मिलेगा। विवि के किसी एक शिक्षक को मिलने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी शोध अनुदान राशि है। डॉ. वर्मा ने यह अनुदान मिलने पर कुलपति प्रो. जेपी सैनी व विभागाध्यक्ष प्रो. एसके सोनी आदि के प्रति आभार व्यक्त किया है।
‘सेमिकॉन इंडिया’ पहल को भी मिलेगा बल
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में सेमीकंडक्टर अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत सरकार की ‘सेमिकॉन इंडिया’ पहल को भी बल प्रदान करेगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा और सशक्त
विश्वविद्यालय में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन नेक्स्ट जेनरेशन सेमीकंडक्टर्स एंड नैनोडिवाइसेस’ की स्थापना हो रही है। यह अनुदान इस केंद्र को और अधिक सशक्त बनाएगा। यह केंद्र सेंसर, सोलर सेल, एलईडी व चिप निर्माण जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।
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डॉ. अंकित ने पिछले वर्ष ‘डेवलपमेंट ऑफ ट्रांसपेरेंट एंड फ्लेक्सिबल सेमीकंडक्टर डिवाइसेज फॉर नेक्स्ट जेनरेशन इलेक्ट्रॉनिक्स’ विषयक अनुसंधान प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे एएनआरएफ ने स्वीकृत करते हुए यह अनुदान प्रदान किया है। यह शोध परियोजना भविष्य के उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास के लिए पारदर्शी एवं लचीले सेमीकंडक्टरों के निर्माण पर केंद्रित है।
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इसका उद्देश्य हल्के, लचीले और पारदर्शी इलेक्ट्रॉनिक घटकों का विकास करना है, जिन्हें पहनने योग्य उपकरणों, स्मार्ट डिस्प्ले, स्वास्थ्य निगरानी प्रणालियों व फोल्डेबल गैजेट्स में प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सके। यह परियोजना तीन वर्ष में पूरी करनी है।
वर्तमान में प्रयुक्त पारंपरिक सेमीकंडक्टर अपेक्षाकृत कठोर होते हैं, जबकि यह शोध उनकी सीमाओं को दूर कर अधिक ऊर्जा कुशल, टिकाऊ एवं बहुउद्देशीय उपकरणों के विकास की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा। इस तकनीक के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, रक्षा एवं संचार क्षेत्रों में संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे।
इससे उत्पादन लागत में कमी, उपकरणों की पोर्टेबिलिटी में वृद्धि व पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा भी मिलेगा। विवि के किसी एक शिक्षक को मिलने वाली यह अब तक की सबसे बड़ी शोध अनुदान राशि है। डॉ. वर्मा ने यह अनुदान मिलने पर कुलपति प्रो. जेपी सैनी व विभागाध्यक्ष प्रो. एसके सोनी आदि के प्रति आभार व्यक्त किया है।
‘सेमिकॉन इंडिया’ पहल को भी मिलेगा बल
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में सेमीकंडक्टर अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत सरकार की ‘सेमिकॉन इंडिया’ पहल को भी बल प्रदान करेगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा और सशक्त
विश्वविद्यालय में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन नेक्स्ट जेनरेशन सेमीकंडक्टर्स एंड नैनोडिवाइसेस’ की स्थापना हो रही है। यह अनुदान इस केंद्र को और अधिक सशक्त बनाएगा। यह केंद्र सेंसर, सोलर सेल, एलईडी व चिप निर्माण जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा।