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बीआरडी मेडिकल कॉलेज : नेहरू चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर आरोप, महालेखाकार से शिकायत

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Apr 2026 02:36 AM IST
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RTI activist alleges administrative irregularities and financial irregularities
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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट शेषनाथ जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (महालेखाकार) को भेजी है। साथ ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज में चल रहे ऑडिट कार्य में लगे अधिकारियों को भी लिखित शिकायत सौंपी है।
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आरोप पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर तत्कालीन सीएमएस को पद से हटाकर महाराजगंज स्थानांतरित किया गया था। आरोप है कि संबंधित आदेश को सर्विस बुक और पी-टू रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किया गया। इसी कथित अनियमितता का लाभ उठाकर अधिकारी को दोबारा मेडिकल कॉलेज में तैनात कर दिया गया और उन्हें महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि नियमों के अनुसार प्रशासनिक आधार पर हटाए गए कर्मचारी को उसी विवादित स्थान पर पुनः तैनात नहीं किया जा सकता और न ही उसे प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर वित्तीय गड़बड़ी के भी आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार ट्रॉमा सेंटर में तैनात संविदा कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग मद से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। इसके अलावा नेहरू चिकित्सालय में संविदा पर कार्यरत कुछ कर्मचारियों का कार्यकाल फरवरी 2016 में समाप्त हो चुका है लेकिन अब तक किसी नए शासनादेश के बिना उनका कार्यकाल बढ़ाकर उन्हें मानदेय दिया जा रहा है। आरोप है कि इसमें बालरोग और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं। शिकायत में पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की गई है।
प्राचार्य डा. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि तीन दिन से टीम आई है। जांच पड़ताल कर रही है। मानव संपदा पोर्टल पर कुछ कर्मियों का नाम अंकित नहीं किया गया था। टीम ने कुछ फाइलें कब्जे में ली है।
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