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गोरखपुर विश्वविद्यालय : हर साल होगी ऑडिट, शोध-नवाचाार की होगी पड़ताल
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में विभागीय कार्यप्रणाली व शिक्षण गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। शिक्षण व्यवस्था में सतत सुधार के लिए अब हर वर्ष एकेडमिक ऑडिट कराने की योजना है। इसके तहत अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, नवाचार आदि का विभागवार मूल्यांकन किया जाएगा।
डीडीयू प्रशासन की ओर से एकेडमिक ऑडिट के लिए गठित समिति ने विस्तृत प्रोफार्मा तैयार कराया है। इस प्रोफार्मा में वह सभी प्रमुख बिंदु शामिल किए गए हैं, जो राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। निर्धारित प्रोफार्मा पर सभी विभागों को विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा। डीडीयू प्रशासन उन विवरणों के आधार पर आगे लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा।
ऑडिट करने वाली टीम में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। वह टीम शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, शोध उपलब्धियों व विभागीय नवाचारों आदि की समीक्षा करेगी। बाहरी विशेषज्ञ सुधार संबंधी सुझाव भी देंगे। उन्हें विभागों में लागू कराया जाएगा। इसका लाभ एनआईआरएफ, नैक समेत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में मिलेगा। एकेडमिक ऑडिट से शिक्षकों और विभागों की जवाबदेही तय होगी और गुणवत्ता में सुधार आएगा।
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बोलीं कुलपति
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि एकेडमिक ऑडिट का उद्देश्य गुणवत्ता में सतत सुधार है। इससे सभी विभागों में शिक्षण, शोध और नवाचार गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी इसका लाभ मिलेगा।
डीडीयू प्रशासन की ओर से एकेडमिक ऑडिट के लिए गठित समिति ने विस्तृत प्रोफार्मा तैयार कराया है। इस प्रोफार्मा में वह सभी प्रमुख बिंदु शामिल किए गए हैं, जो राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। निर्धारित प्रोफार्मा पर सभी विभागों को विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना होगा। डीडीयू प्रशासन उन विवरणों के आधार पर आगे लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा।
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ऑडिट करने वाली टीम में बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। वह टीम शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, शोध उपलब्धियों व विभागीय नवाचारों आदि की समीक्षा करेगी। बाहरी विशेषज्ञ सुधार संबंधी सुझाव भी देंगे। उन्हें विभागों में लागू कराया जाएगा। इसका लाभ एनआईआरएफ, नैक समेत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में मिलेगा। एकेडमिक ऑडिट से शिक्षकों और विभागों की जवाबदेही तय होगी और गुणवत्ता में सुधार आएगा।
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