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Gorakhpur News: एंबुलेंस पर बढ़ी सख्ती तो ऑटो से लेकर जाने लगे मरीज
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 दिन में छह एंबुलेंस हो चुकी हैं सीज
तीमारदारों को झांसे में लेते हुए मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराते हैं बिचौलिए
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पुलिस निजी अस्पतालों के एंबुलेंस के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। ऐसे में मरीज माफिया ने अब तरीका बदल दिया है। अब वे एंबुलेंस की जगह ऑटो से मरीजों को निजी अस्पताल भेजने लगे हैं। पुलिस ने शुक्रवार की रात दो संदिग्ध ऑटो को सीज भी किया है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में मरीज माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं। ट्रामा सेंटर के पास निजी अस्पतालों के बिचौलिए घूमते रहते हैं जो तीमारदारों को झांसे में लेते हुए मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही ये बाहर से एंबुलेंस को बुला लेते हैं।
पिछले कुछ दिनों में पुलिस ने सख्ती बढ़ाते हुए छह एंबुलेंस सीज की हैं। सभी या तो मरीज को बहकाकर निजी अस्पताल लेकर जा रहे थे या परिसर में संदिग्ध घूम रहे थे। इसके बाद अब मरीज माफिया ने अपने तरीके में बदलाव किया है। अब वे ऑटो से मरीजों को लेकर जा रहे हैं। शुक्रवार की रात पुलिस ने दो ऐसे ही संदिग्ध ऑटो को सीज किया है।
सभी का जुड़ा रहता है कमीशन
दरअसल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर चाय की टपरी और मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक मरीज माफिया का नेटवर्क फैला हुआ है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज के तीमारदारों को बहलाकर ये निजी अस्पताल में लेकर चले जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई के बाद अब वे एंबुलेंस को लेकर अस्पताल के आसपास नहीं घूमते। एंबुलेंस थोड़ी दूरी पर खड़ी रहती है और जगह-जगह बिचौलिए घूमते रहते हैं। अस्पताल के अंदर भी माफिया से जुड़े लोग हैं जो मरीज के आते ही सूचना दे देते हैं। गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को कहते हैं कि यहां पर इसकी तत्काल इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसे दूसरे अस्पताल में ले जाएं वरना जान चली जाएगी। यह सुनकर तीमारदार तनाव में आ जाते हैं। इसके बाद वहीं पर बिचौलिए घूमते हैं जो किसी निजी अस्पताल के बारे में जानकारी देते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही पांच मिनट के अंदर एंबुलेंस आ जाती है और मरीज को लेकर चले जाते हैं। इसमें अस्पताल के कर्मचारी सहित सभी लोगों का कमीशन जुड़ा रहता है।
अच्छे डॉक्टर और इलाज का देते हैं हवाला
मरीज माफिया तीमारदारों को अच्छे डाक्टर व इलाज का हवाला देकर बहकाते हैं। इसके बदले में अस्पताल से मोटी रकम लेकर मौज-मस्ती करते हैं। बीआरडी में गेट पर आने-जाने वाली गाड़ियों का नंबर नोट किया जाता है और उनसे पूछताछ भी होती है। चूंकि मरीज के तीमारदार यदि दूसरे अस्पताल में जाना चाहते हैं तो उन्हें रोका नहीं जा सकता, इसी वजह से बिचौलिए मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि इस काम में ऑटो चालकों की भूमिका काफी ज्यादा है। वह सवारी की जगह ऐसे मरीजों को ही खोजते हैं। एक मरीज पर ही उन्हें कम से कम पांच हजार रुपये तक कमीशन मिल जाता है। सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया रात में ही सक्रिय होते हैं। दिन में वह बाहर की दुकानों पर बैठकर प्लानिंग करते हैं। शाम होते ही वह अलग-अलग जगहों पर घूमते रहते हैं। दूसरे जिलों और बिहार से रेफर होकर आने वाले मरीजों को ही वह टारगेट करते हैं क्योंकि उनको शहर के बारे में जानकारी नहीं होती।
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तीमारदारों को झांसे में लेते हुए मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराते हैं बिचौलिए
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पुलिस निजी अस्पतालों के एंबुलेंस के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। ऐसे में मरीज माफिया ने अब तरीका बदल दिया है। अब वे एंबुलेंस की जगह ऑटो से मरीजों को निजी अस्पताल भेजने लगे हैं। पुलिस ने शुक्रवार की रात दो संदिग्ध ऑटो को सीज भी किया है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर में मरीज माफिया लंबे समय से सक्रिय हैं। ट्रामा सेंटर के पास निजी अस्पतालों के बिचौलिए घूमते रहते हैं जो तीमारदारों को झांसे में लेते हुए मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही ये बाहर से एंबुलेंस को बुला लेते हैं।
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पिछले कुछ दिनों में पुलिस ने सख्ती बढ़ाते हुए छह एंबुलेंस सीज की हैं। सभी या तो मरीज को बहकाकर निजी अस्पताल लेकर जा रहे थे या परिसर में संदिग्ध घूम रहे थे। इसके बाद अब मरीज माफिया ने अपने तरीके में बदलाव किया है। अब वे ऑटो से मरीजों को लेकर जा रहे हैं। शुक्रवार की रात पुलिस ने दो ऐसे ही संदिग्ध ऑटो को सीज किया है।
सभी का जुड़ा रहता है कमीशन
दरअसल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाहर चाय की टपरी और मेडिकल स्टोर से लेकर अस्पताल के अंदर तक मरीज माफिया का नेटवर्क फैला हुआ है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज के तीमारदारों को बहलाकर ये निजी अस्पताल में लेकर चले जाते हैं। सूत्रों ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई के बाद अब वे एंबुलेंस को लेकर अस्पताल के आसपास नहीं घूमते। एंबुलेंस थोड़ी दूरी पर खड़ी रहती है और जगह-जगह बिचौलिए घूमते रहते हैं। अस्पताल के अंदर भी माफिया से जुड़े लोग हैं जो मरीज के आते ही सूचना दे देते हैं। गंभीर स्थिति में आने वाले मरीज को कहते हैं कि यहां पर इसकी तत्काल इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसे दूसरे अस्पताल में ले जाएं वरना जान चली जाएगी। यह सुनकर तीमारदार तनाव में आ जाते हैं। इसके बाद वहीं पर बिचौलिए घूमते हैं जो किसी निजी अस्पताल के बारे में जानकारी देते हैं। तीमारदार के तैयार होते ही पांच मिनट के अंदर एंबुलेंस आ जाती है और मरीज को लेकर चले जाते हैं। इसमें अस्पताल के कर्मचारी सहित सभी लोगों का कमीशन जुड़ा रहता है।
अच्छे डॉक्टर और इलाज का देते हैं हवाला
मरीज माफिया तीमारदारों को अच्छे डाक्टर व इलाज का हवाला देकर बहकाते हैं। इसके बदले में अस्पताल से मोटी रकम लेकर मौज-मस्ती करते हैं। बीआरडी में गेट पर आने-जाने वाली गाड़ियों का नंबर नोट किया जाता है और उनसे पूछताछ भी होती है। चूंकि मरीज के तीमारदार यदि दूसरे अस्पताल में जाना चाहते हैं तो उन्हें रोका नहीं जा सकता, इसी वजह से बिचौलिए मरीज को प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने में सफल हो जाते हैं। बताया जा रहा है कि इस काम में ऑटो चालकों की भूमिका काफी ज्यादा है। वह सवारी की जगह ऐसे मरीजों को ही खोजते हैं। एक मरीज पर ही उन्हें कम से कम पांच हजार रुपये तक कमीशन मिल जाता है। सूत्रों ने बताया कि मरीज माफिया रात में ही सक्रिय होते हैं। दिन में वह बाहर की दुकानों पर बैठकर प्लानिंग करते हैं। शाम होते ही वह अलग-अलग जगहों पर घूमते रहते हैं। दूसरे जिलों और बिहार से रेफर होकर आने वाले मरीजों को ही वह टारगेट करते हैं क्योंकि उनको शहर के बारे में जानकारी नहीं होती।