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Gorakhpur News: बांस की ज्वेलरी का नया ट्रेंड, महिलाओं को खूब भा रहे झुमके और हार
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:54 AM IST
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- महीन डिजाइन के साथ छोटे-छोटे आभूषण महिलाओं को खूब भा रहे
- सीएफसी में महिलाएं तैयार कर रहीं आभूषण
गोरखपुर। सीएफसी में अब बांस के झुमके और हार तैयार किए जा रहे हैं। बैंबू लेडी ऑफ इंडिया की नीरा शर्मा और उनकी टीम ने जरूरतमंदों को बांस के झुमके, हार और कंगन के अलावा अन्य आभूषण बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद बांस से सस्ती और खूबसूरत ज्वेलरी तैयार की जाने लगी। अब ये महिलाएं सीएफसी (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) में झुमके, हार और कंगन तैयार कर रही हैं।
सस्ते दर पर बांस के बने आर्टिफिशियल आभूषण महिलाओं के साथ लोगों को भी खूब भा रहे हैं। इसके अलावा दूसरी आर्टिफिशियल फैंसी ज्वेलरी को भी पसंद किया जा रहा है। यही नहीं बैंबू या रिंगाल के आभूषण भी पसंद किए जा रहे हैं। अभी तक सीएफसी केंद्र पर हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, फर्नीचर निर्माण की तरफ महिलाओं ने रुचि दिखाई थी। केंद्र का लक्ष्य था कि श्रम के साथ इसका उचित मूल्य भी उपलब्ध हो।
सीएफसी में बांस के उत्पाद में फ्लावर स्टैंड, गुलदस्ता, नाइटलैंप, गोरखनाथ मंदिर का मॉडल, नाव, कप, कुर्सी-मेज समेत कई सजावटी व उपयोगी वस्तुओं को लोग पसंद कर रहे हैं। इनकी मांग खासकर दीपावली पर घरों को सजाने के लिए होती है। इसके बाद सहालग और शादी को देखते हुए दीपावली में सोने-चांदी के बढ़े दामों से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बांस के गहने बनाने शुरू कर दिए हैं।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि इसके लिए कैंप में 30 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें बांसफोड़ समाज के 50 प्रतिशत और इसके बाद आर्थिक रूप से जरूरतमंदों को शामिल किया गया। प्रशिक्षित होने के बाद इनके बनाए गए बांस के उत्पाद पूर्वांचल ही नहीं देश-विदेश तक के लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इसके अलावा बांस के अन्य उत्पादों को तैयार करने में 700 से अधिक महिलाएं व पुरुष प्रतिदिन जुटे रहते हैं। गहने खरीदने की बात हो तो महिलाओं की पहली पसंद सोने के जेवर रहते हैं, लेकिन बदलते दौर में महिलाएं सोना, चांदी, हीरे के साथ ही बांस के झुमके और हार भी पसंद कर रही हैं।
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- सीएफसी में महिलाएं तैयार कर रहीं आभूषण
गोरखपुर। सीएफसी में अब बांस के झुमके और हार तैयार किए जा रहे हैं। बैंबू लेडी ऑफ इंडिया की नीरा शर्मा और उनकी टीम ने जरूरतमंदों को बांस के झुमके, हार और कंगन के अलावा अन्य आभूषण बनाने का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद बांस से सस्ती और खूबसूरत ज्वेलरी तैयार की जाने लगी। अब ये महिलाएं सीएफसी (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) में झुमके, हार और कंगन तैयार कर रही हैं।
सस्ते दर पर बांस के बने आर्टिफिशियल आभूषण महिलाओं के साथ लोगों को भी खूब भा रहे हैं। इसके अलावा दूसरी आर्टिफिशियल फैंसी ज्वेलरी को भी पसंद किया जा रहा है। यही नहीं बैंबू या रिंगाल के आभूषण भी पसंद किए जा रहे हैं। अभी तक सीएफसी केंद्र पर हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, फर्नीचर निर्माण की तरफ महिलाओं ने रुचि दिखाई थी। केंद्र का लक्ष्य था कि श्रम के साथ इसका उचित मूल्य भी उपलब्ध हो।
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सीएफसी में बांस के उत्पाद में फ्लावर स्टैंड, गुलदस्ता, नाइटलैंप, गोरखनाथ मंदिर का मॉडल, नाव, कप, कुर्सी-मेज समेत कई सजावटी व उपयोगी वस्तुओं को लोग पसंद कर रहे हैं। इनकी मांग खासकर दीपावली पर घरों को सजाने के लिए होती है। इसके बाद सहालग और शादी को देखते हुए दीपावली में सोने-चांदी के बढ़े दामों से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बांस के गहने बनाने शुरू कर दिए हैं।
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि इसके लिए कैंप में 30 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें बांसफोड़ समाज के 50 प्रतिशत और इसके बाद आर्थिक रूप से जरूरतमंदों को शामिल किया गया। प्रशिक्षित होने के बाद इनके बनाए गए बांस के उत्पाद पूर्वांचल ही नहीं देश-विदेश तक के लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इसके अलावा बांस के अन्य उत्पादों को तैयार करने में 700 से अधिक महिलाएं व पुरुष प्रतिदिन जुटे रहते हैं। गहने खरीदने की बात हो तो महिलाओं की पहली पसंद सोने के जेवर रहते हैं, लेकिन बदलते दौर में महिलाएं सोना, चांदी, हीरे के साथ ही बांस के झुमके और हार भी पसंद कर रही हैं।