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Gorakhpur News: एम्स में संक्रमित छाती से प्लाज्मा का सफल प्रत्यर्पण, मिला जीवन
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- सीने की मांसपेशियों के कमजोर होने से सांस लेने में होती थी दिक्कत
- चिकित्सकीय टीम ने आधुनिक विधि से संक्रमित छाती से हानिकारक प्लाज्मा निकाल कर स्वस्थ प्लाज्मा बदला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मायस्थेनिक क्राइसिस (छाती की मांसपेशियां कमजोर होना) के सफल उपचार किया गया है। लंबे समय से बीमारी से जूझने से सांस लेने वाली मांसपेशियां (डायाफ्राम और छाती की मांसपेशियां) काफी कमजोर हो गई थीं और मरीज ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था।
एम्स की तरफ से थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज( हानिकारक प्लाज्मा निकाल कर स्वस्थ प्लाज्मा बदलना) विधि से फिर से स्वस्थ किया गया है। गोरखपुर एम्स शहर का पहला चिकित्सकीय संस्थान हैं, जहां इस बीमारी का आधुनिक विधि से उपचार संभव हो सका है।
दरअसल, मायस्थेनिया ग्रेविस( मांसपेसियों की कमजोरी और थकान) से पीड़ित एक गंभीर रोगी पिछले दिनों मायस्थेनिक क्राइसिस की बीमारी से ग्रसित होने के बाद एम्स में उपचार के लिए पहुंचे। इस अवस्था में में रोगी को गंभीर मांसपेशीय कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई, निगलने और बोलने में परेशानी जैसी गंभीर लक्षण हो जाते हैं। समय पर उचित उपचार नहीं मिलने पर रेस्पिरेटरी फेल्योर (फेफड़े तक सांस नहीं पहुंचना) तक पहुंच सकती है और मरीज की जान पर भी बन सकती है।
ऐसे मरीज का समय से उपचार होना बेहद जरूरी होता है। एम्स में ऐसे मरीजों के उपचार के लिए आधुनिक विधि थेरैप्यूटिक प्लाज़्मा एक्सचेंज की सुविधा भी है। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा के निगरानी में मरीज को भर्ती करवाया गया और सफल तरीके से फेफड़ों तक पहुंच पाने वाले रक्त के दूषित प्लाज्मा को बदलकर मरीज को स्वस्थ किया गया।
इस दौरान उनके साथ में न्यूरो विभाग के डॉ. आशुतोष तिवारी, डॉ. सामर्थ मौजूद रहे। वहीं, रैप्यूटिक प्लाज़्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया डॉ. सौरभ मूर्ति, तकनीकी कर्मी रविन्द्र मौजूद रहे। ये पूरी चिकित्सकीय पद्दति को आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया गया, जिससे उपचार के लिए परिजनों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं आया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मायस्थेनिक क्राइसिस (छाती की मांसपेशियां कमजोर होना) के सफल उपचार किया गया है। लंबे समय से बीमारी से जूझने से सांस लेने वाली मांसपेशियां (डायाफ्राम और छाती की मांसपेशियां) काफी कमजोर हो गई थीं और मरीज ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था।
एम्स की तरफ से थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज( हानिकारक प्लाज्मा निकाल कर स्वस्थ प्लाज्मा बदलना) विधि से फिर से स्वस्थ किया गया है। गोरखपुर एम्स शहर का पहला चिकित्सकीय संस्थान हैं, जहां इस बीमारी का आधुनिक विधि से उपचार संभव हो सका है।
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दरअसल, मायस्थेनिया ग्रेविस( मांसपेसियों की कमजोरी और थकान) से पीड़ित एक गंभीर रोगी पिछले दिनों मायस्थेनिक क्राइसिस की बीमारी से ग्रसित होने के बाद एम्स में उपचार के लिए पहुंचे। इस अवस्था में में रोगी को गंभीर मांसपेशीय कमजोरी, सांस लेने में कठिनाई, निगलने और बोलने में परेशानी जैसी गंभीर लक्षण हो जाते हैं। समय पर उचित उपचार नहीं मिलने पर रेस्पिरेटरी फेल्योर (फेफड़े तक सांस नहीं पहुंचना) तक पहुंच सकती है और मरीज की जान पर भी बन सकती है।
ऐसे मरीज का समय से उपचार होना बेहद जरूरी होता है। एम्स में ऐसे मरीजों के उपचार के लिए आधुनिक विधि थेरैप्यूटिक प्लाज़्मा एक्सचेंज की सुविधा भी है। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्रा के निगरानी में मरीज को भर्ती करवाया गया और सफल तरीके से फेफड़ों तक पहुंच पाने वाले रक्त के दूषित प्लाज्मा को बदलकर मरीज को स्वस्थ किया गया।
इस दौरान उनके साथ में न्यूरो विभाग के डॉ. आशुतोष तिवारी, डॉ. सामर्थ मौजूद रहे। वहीं, रैप्यूटिक प्लाज़्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया डॉ. सौरभ मूर्ति, तकनीकी कर्मी रविन्द्र मौजूद रहे। ये पूरी चिकित्सकीय पद्दति को आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया गया, जिससे उपचार के लिए परिजनों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं आया।
